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बुलेट ट्रेन के काम ने पकड़ी रफ्तार: टनल बोरिंग मशीन को असेंबल करने का काम शुरू, अहमदाबाद में भी बनाया रिकॉर्ड

Sat, 11 Apr 2026 07:13 PM IST
राकेश कुमार आईएएनएस, मुंबई

सार

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत मुंबई के सावली में दूसरी टनल बोरिंग मशीन को जमीन से 39 मीटर नीचे जोड़ने का काम शुरू हो गया है। अब जुलाई से सुरंग की खुदाई शुरू हो सकेगी। वहीं, अहमदाबाद में रेलवे लाइन के ऊपर 1,360 टन का भारी बीम रखकर इंजीनियरिंग का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है।
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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना - फोटो : @IANS
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विस्तार
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भारत के पहले बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मुंबई और अहमदाबाद के बीच दौड़ने वाली इस हाई-स्पीड ट्रेन के लिए टनल बनाने का काम अब अगले चरण में पहुंच गया है। घनसोली के पास सावली में दूसरी टनल बोरिंग मशीन को असेंबल यानी एकत्रित करने का काम शुरू कर दिया गया है।
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इसे जमीन से लगभग 39 मीटर नीचे एक गहरे शाफ्ट में अंजाम दिया जा रहा है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के इंजीनियरों के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन उन्होंने बेहद सटीकता के साथ इस विशालकाय मशीन के पुर्जों को नीचे उतारना शुरू कर दिया है।

190 टन का ढांचा नीचे उतरा
इस प्रक्रिया के दौरान एक बड़ी सफलता तब मिली, जब 190 मीट्रिक टन वजनी एक भारी-भरकम 'गैन्ट्री' को शाफ्ट के अंदर सही जगह पर बैठाया गया। यह ढांचा 18 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, हर टनल बोरिंग मशीन में ऐसी चार गैन्ट्री होती हैं, जो मशीन के मुख्य हिस्से से जुड़ी रहती हैं।
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ये मशीनें न केवल मिट्टी की खुदाई करेंगी, बल्कि साथ ही साथ सुरंग की दीवारों पर कंक्रीट के सेगमेंट लगाने और वाटरप्रूफिंग का काम भी करेंगी। सावली से खुदाई का मुख्य काम जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है, जो विक्रोली की तरफ बढ़ेगा।

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अहमदाबाद में भी रचा गया इतिहास
सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि अहमदाबाद में भी इंजीनियरिंग का एक बड़ा कारनामा देखने को मिला है। इसी हफ्ते मणिनगर इलाके में चालू रेलवे लाइन के ऊपर एक विशाल 1,360 मीट्रिक टन का प्रीकास्ट पोर्टल बीम सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

34 मीटर लंबे इस बीम को रखने के लिए भारतीय रेलवे के साथ तालमेल बिठाकर ट्रैफिक और पावर ब्लॉक लिया गया था। इस काम के लिए 2,200 टन की क्षमता वाली विशाल क्रॉलर क्रेन का इस्तेमाल किया गया। मात्र 3.5 घंटे के भीतर इस भारी-भरकम ढांचे को हवा में उठाकर पटरियों के ऊपर सेट कर दिया गया, जो अपने आप में एक मिसाल है।
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जापानी तकनीक से बदल जाएगी सफर की तस्वीर
508 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर जापानी शिनकान्सेन तकनीक पर आधारित है। इसमें ऊंचे पुल, ऊंचे ट्रैक और समंदर के नीचे से गुजरने वाली सुरंगें शामिल हैं। एक बार तैयार होने के बाद, मुंबई से अहमदाबाद के बीच का सफर कुछ घंटों में पूरा होगा।

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