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मल्टी पैलेट गन: उपद्रवियों को काबू में रखेगा ये खास ग्रेनेड, आंसू गैस के इस गोले को निष्क्रिय नहीं कर सकेगी भी

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पैलेट गन (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस द्वारा उपद्रवियों की भीड़ पर काबू पाने के लिए घातक पैलेट गन का इस्तेमाल अंतिम उपाय के रूप में ही किया जाएगा। उपद्रवियों पर ठोस तरीके से काबू पाने के लिए मल्टी पैलेट गन से अब एक खास 'ग्रेनेड' फेंका जाएगा। आंसू गैस वाले ग्रेनेड की खासियत यह होगी कि इसे भीड़ द्वारा निष्क्रिय नहीं किया जा सकेगा। उग्र विरोध प्रदर्शन के दौरान जब आंसू गैस का सामान्य गोला छोड़ा जाता है तो कई बार भीड़ द्वारा उसे उठाकर वापस सुरक्षा बलों पर फेंक दिया जाता है। अब जो ग्रेनेड तैयार किया गया है, उसे दोबारा से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 

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पैलेट गन का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा
नई दिल्ली में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'सीजेपी' का विरोध प्रदर्शन जब हिंसक हुआ तो सुरक्षा बलों ने भीड़ को काबू करने के लिए पैनेट गन का इस्तेमाल किया था। इसके चलते कई युवकों को गंभीर चोट लगी। विपक्षी दलों ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पैलेट गन का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। हालांकि इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। 

सर्वोच्च न्यायालय का कहना था कि अत्यधिक गंभीर या असाधारण परिस्थितियों में जब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के पास गोली चलाने का अधिकार है, तो पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना ठीक नहीं है। पैलेट गन का इस्तेमाल अंतिम उपाय के रूप में ही किया जाना चाहिए। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर जवाब मांगा था। 
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इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय में पैलेट गन और इसके इस्तेमाल को लेकर वरिष्ठ अफसरों की बैठक हुई। पैलेट गन का इस्तेमाल कम से कम हो और वह घातक न हो, इस बाबत नई गाइडलाइंस जारी करने पर विचार हुआ। इसके अलावा हिंसक भीड़ पर काबू पाने के लिए नए 'मल्टी पैलेट टियर स्मोक ग्रेनेड' के इस्तेमाल पर सहमति बनी। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) द्वारा ग्रेनेड फेंकने वाली गन का ट्रायल भी कराया गया। इस 'टियर स्मोक ग्रेनेड' को बीएसएफ द्वारा तैयार किया गया है।   

हवा में फैल जाते हैं ये गोले
टियर स्मोक ग्रेनेड की खासियत यह है कि इसमें से एक साथ कई पैलेट यानी छोटे-छोटे गोले निकलते हैं। जैसे ही ग्रेनेड गिरता है तो ये गोले तुरंत हवा में फैल जाते हैं। ऐसे में ग्रेनेड पर गीली बोरी या पानी में भिगोया हुआ कोई दूसरा कपड़ा डालना कारगर साबित नहीं होता। किसान आंदोलन के दौरान आंसू गैस के गोलों को इसी तरीके से निष्क्रिय किया जाता रहा है। 

नए ग्रेनेड में आंसू गैस के अनेकों छोटे पैलेट निकलते हैं। ऐसे में ग्रेनेड को वापस सुरक्षा बलों पर फेंकना या उसे निष्क्रिय करना, आसान नहीं होता। इस ग्रेनेड को फेंकने की रेंज अलग-अलग होती है। यह सौ मीटर से ढाई सौ मीटर की परिधि में प्रभावी तरीके से काम कर सकता है। इस ग्रेनेड से आंसू गैस निकलने की रफ्तार इतनी तेज होती है कि वह जमीन, व्यक्ति या अन्य वस्तु के संपर्क में आते ही फैल जाती है। आंसू गैस वाले इस ग्रेनेड से सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस बलों को लैस किया जा रहा है। 

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