राजनीति से सन्यास लेने की उम्र में पहुंच चुके मुलामय ने जीवन जल्दी हार नहीं मानी। पुत्र अखिलेश के साथ राजनीतिक लड़ाई में भी झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। मुलायम पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहना चाहते हैं और यदि अखिलेश नहीं माने तो वह विधानसभा चुनाव 2017 की राजनीतिक लड़ाई में पुत्र अखिलेश से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं लखनऊ से दिल्ली आने के बाद मुलायम ने इसकी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
मुलायम की नजर उ.प्र. में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चेहरा सामने रखकर अखिलेश को संदेश देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए आजम खां समेत कुछ नेताओं के नाम पर पार्टी विचार कर रही है। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि कद्दावर आजम अल्पसंख्यक चेहरा हैं।
हालांकि अभी मुलायम ने इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है। सूत्र बताते हैं कि मुलायम लगातार उ.प्र. के पार्टी के कई नेताओं के संपर्क में हैं। वह केन्द्र के भी कुछ नेताओं के संपर्क में हैं।
सोमवार को चुनाव आयोग में भी मुलायम ने जरा सा भी झुकने का संदेश नहीं दिया। उन्होंने प्रो. राम गोपाल द्वारा बुलाए गए राष्ट्रीय सम्मेलन को असंवैधानिक करार दिया। यहां तक कि रामगोपाल गुट के लोगों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गई दस्तावेजी प्रतियों को लेने से इनकार कर दिया।
मुलायम ने पार्टी, सिंबल, कार्यालय सभी पर अपना दावा ठोंका। समाजवादी पार्टी के संस्थापक ने चुनाव आयोग से अपील की वह उनकी पार्टी के मुद्दे पर जल्द से जल्द निर्णय ले, क्योंकि 11 फरवरी से मतदान शुरू हो जाएगा। इसलिए वक्त काफी कम है।
इस समय मुलामय भाई शिवपाल के साथ हैं। अमर सिंह के अलावा बेनी प्रसाद वर्मा, आजम खां, अंबिका चौधरी समेत पार्टी के तमाम नेताओं से लगातार मंत्रणा कर रहे हैं।