यूपी की सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पर्दे के पीछे मुलायम के नाम पर बड़े फैसले कोई और ले रहा है। सवाल इसलिए खड़ा हुआ कि एक जनवरी को अखिलेश यादव और रामगोपाल द्वारा बुलवाए गए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद मुलायम सिंह के नाम से पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा और रामगोपाल को सपा से निकालने की जो दो चिट्ठियां जारी हुई उन दोनों में मुलायम के अलग अलग साइन थे।
किरणमय नंदा ने आरोप लगाया कि कोई मुलायम के फर्जी साइन कर पार्टी और सपा सुप्रीमो को गुमराह कर रहा है। किरणमय नंदा ने दोनों चिट्ठियों को फर्जी बताते हुए कहा वो चिट्ठी आप देख सकते हैं जिसमें राष्ट्रीय अधिवेशन को असैंवधानिक बताते हुए लिखा गया है उसमें नेताजी के साइन अलग हैं और दूसरी चिट्ठी में अलग।
ऐसे में घूम फिर एक सवाल सबके जेहन में अटक रहा है कि क्या मुलायम सिंह के नाम से कोई और फैसले ले कर चिट्ठियां जारी कर रहा है। बात में इसलिए भी दम है कि खुद उनके पुत्र और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इस बात की आशंका जता चुके हैं कि कुछ लोगों ने नेताजी को अपने कब्जे में ले रखा है वो अपने अलावा किसी और की बात उन तक पहुंचने ही नहीं दे रहे हैं।
शिवपाल के ट्वीटर अकाउंट से जारी हुए दोनों खत
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असल में सवाल उस समय खड़ा हुआ जब एक जनवरी को बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद मुलायम सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाकर खुद अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। इस अधिवेशन में पार्टी के महासचिव किरणमय नंदा, रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल सहित कई बड़े नेता शामिल रहे।
वहीं अखिलेश खेमे के इस कदम के बाद मुलायम सिंह यादव की ओर से आनन फानन में दो चिट्ठियां जारी की गईं। मुलायम सिंह के नाम से जारी पहली चिट्ठी में रामगोपाल द्वारा बुलवाए गए अधिवेशन को असैंवधानिक बताते हुए इस दौरान लिए गए सभी निर्णयों को अवैध बताया गया। मुलायम सिंह के नाम से जारी इस चिट्ठी में जो साइन किए गए उसमें मुलायम का आधा नाम सिर्फ मुलायम सिंह लिखा हुआ है जबकि आमतौर पर वह अपना पूरा नाम मुलायम सिंह यादव लिखकर ही कोई पत्र जारी करते हैं।
इसके कुछ देर बाद मुलायम के नाम से किरणमय नंदा के नाम से एक और चिट्ठी जारी की गई जिसमें नंदा को असंवैधानिक 'आपातकालीन राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन' में भाग लेने के आरोप में पार्टी के उपाध्यक्ष पद से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। इस चिट्ठी में जो साइन किए गए वो अलग थे उसमें मुलायम सिंह ने अपना पूरा नाम लिखकर साइन किए हैं।
सपा प्रवक्ता का दावा भावनाओं में किए मुलायम ने साइन
खास बात ये है कि अलग अलग हस्ताक्षर वाली ये दोनों चिट्ठियां शिवपाल सिंह यादव के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किए गए। जो अब भी उनके ट्वीटर अकाउंट पर हैं।
हालांकि मुलायम खेमे के और पार्टी प्रवक्ता सीपी राय का दावा है कि दोनों चिट्ठियां मुलायम की ओर से ही जारी की गई है। उनका तर्क है कि मुलायम ने दोनों खतों पर भावनाओं में साइन किए थे इसलिए दोनों दस्तखत अलग अलग हो गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि जब तक खुद नेताजी सामने आकर इस बात का खंडन नहीं करते तब तक इन पर सवाल उठाने का कोई तर्क नहीं है।