फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीएमसी विधायक हत्या मामले में गिरफ्तारी से डरे मुकुल रॉय, दायर की अग्रिम जमानत याचिका

Tue, 12 Feb 2019 01:34 PM IST
तिवारी अभिषेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
विज्ञापन
- फोटो : ANI
विज्ञापन

भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत विश्वास की हत्या के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। मामले की सुनवाई इसी सप्ताह में होने की संभावना है। 

विज्ञापन

 



उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में शनिवार रात को तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत विश्वास की हत्या के मामले में मुकुल रॉय समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। राय ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है।

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी थी कि मामले में नामजद चार में से दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। चार आरोपियों के अलावा तीन अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है। जिस देसी रिवाल्वर से विधायक को गोली मारी गई उसे बरामद कर लिया गया है। प्राथमिक जांच से पता चला है कि विश्वास को एक सुनियोजित योजना के तहत पीछे से गोली मारी गई। एक अधिकारी ने बताया कि नदिया बांग्लादेश की सीमा से लगा है। ऐसे में अभियुक्तों के फरार होकर पड़ोसी देश में जाने का संभावना है। इसके लिए सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
विज्ञापन


बता दें कि जिले के कृष्णगंज क्षेत्र के विधायक विश्वास (41) को फूलबाड़ी इलाके में उनके घर के समीप सरस्वती पूजा के एक पंडाल में काफी नजदीक से गोली मारी गई थी। जिसके बाद उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने विश्वास को मृत घोषित कर दिया। 

कौन हैं मुकुल रॉय
मुकुल रॉय टीएमसी के पूर्व सांसद हैं। मनमोहन सरकार में वह रेल मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके हैं। ममता बनर्जी के साथ रिश्तों में आई खटास के बाद उन्होंने पिछले साल भाजपा का दामन थाम लिया था। शारदा चिटफंड मामले में भी उनका नाम आया था। ममता बनर्जी ने जब रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया था तब मुकुल रॉय को यह कार्यभार सौंपा गया था।

11 जुलाई 2011 को असम में हुए एक रेल दुर्घटना पर प्रधानमंत्री के कहने के बावजूद मुकुल रॉय दुर्घटनास्थल पर नहीं गए थे। जिसके बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें रेल मंत्री पद देने की अनिच्छा ममता बनर्जी से जताई थी, इसके बाद ही दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्री बनाया गया था।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें