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म्यूकॉरमाइकोसिस: केंद्र ने कहा, कोरोना मरीजों के लिए बड़ा खतरा नहीं है यह संक्रमण

Fri, 07 May 2021 07:10 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने शुक्रवार को कहा कि म्यूकॉरमाइकोसिस केवल उन लोगों को प्रभावित करता है जिनके रक्त में शर्करा (शुगर) का स्तर अधिक होता है। 
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डॉ. वीके पॉल - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कोविड-19 के मरीजों के बीच म्यूकॉरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस की खबरों पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक है और म्यूकॉरमाइकोसिस व कोरोना के बीच कुछ खास संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि म्यूकॉरमाइकोसिस संक्रमण केवल उन लोगों को प्रभावित करता है जिनके रक्त में शुगर का स्तर अधिक होता है। 

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बता दें कि कोविड-19 से पीड़ित रोगियों में फंगल इंफेक्शन म्यूकोरमाइकोसिस पाया जा रहा है और मुख्यत: उन लोगों में यह संक्रमण पाया जा रहा है जो मधुमेह से पीड़ित हैं लेकिन इसके ज्यादा मामले नहीं हैं। शुक्रवार को नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी. के. पाल ने यह बात कहते हुए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्थिति की निगरानी की जा रही है और म्यूकोरमाइकोसिस का उपचार उपलब्ध है।

दिल्ली के एक बड़े निजी अस्पताल ने एक दिन पहले ही कोविड-19 के कारण म्यूकोरमाइकोसिस या (काला फंगस) के बढ़ते मामलों को उजागर किया था। पाल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि फंगल इंफेक्शन जिसे म्यूकोरमाइकोसिस कहा जाता है, वह कोविड-19 की बीमारी में पाया जा रहा है। यह म्यूकर नाम के फंगस के कारण होता है जो गीली सतह पर पाया जाता है। 
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उन्होंने कहा कि यह मुख्यत: उन लोगों को हो रहा है जो मधुमेह से पीड़ित हैं। यह उन लोगों में सामान्यत: नहीं पाया जा रहा है जिन्हें मधुमेह की शिकायत नहीं है। इसके ज्यादा मामले नहीं हैं और हम नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित मधुमेह वालों पर म्यूकर हमला करता है।

इसके अलावा मधुमेह का रोगी अगर प्रतिरोधक क्षमता को दबाने वाली दवाएं, स्टेरॉयड ले रहा है या जिसे कैंसर है, तो फिर उस व्यक्ति में म्यूकोरमाइकोसिस का प्रभाव ज्यादा है। अगर ऐसे रोगी गीली सतह के संपर्क में आते हैं तो इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है।

पाल ने कहा कि प्रतिरोधक क्षमता को कम करने वाली लेकिन जीवन रक्षक दवाएं जैसे डेक्सामेथासोन, प्रेडनीसोलोन, मिथाइलप्रेडिनीसोलोन, डेक्सोना आदि का इस्तेमाल कोविड-19 से पीड़ित रोगियों के इलाज में किया जा रहा है।

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