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Fingolimod: एचआईवी के इलाज में बड़ी कामयाबी, मल्टीपल स्केलेरोसिस की दवा वायरस के खात्मे में कारगर

सार

Fingolimod: एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि मल्टीपल स्केलेरोसिस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा फिंगोलिमोड एचआईवी वायरस को शरीर में पनपने से रोकने में काफी प्रभावी हो सकती है। एक एचआईवी संक्रमित मरीज में यह दवा लेने के दौरान वायरस का स्तर बेहद कम पाया गया और तीन साल के इलाज के बाद उसके शरीर में सक्रिय एचआईवी लगभग खत्म हो गया। पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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एचआईवी के इलाज और फंक्शनल क्योर की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। एक नये अध्ययन में पाया गया है कि मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दुर्लभ बीमारी (मल्टीपल स्केलेरोसिस) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा फिंगोलिमोड एचआईवी वायरस को शरीर में पनपने से रोकने में बेहद प्रभावी साबित हो सकती है।
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शोधकर्ताओं ने एक ऐसे मरीज का अध्ययन किया, जिसे मल्टीपल स्केलेरोसिस था और वह कई वर्षों से फिंगोलिमोड ले रहा था। इस दौरान उसे एचआईवी संक्रमण हुआ। वैज्ञानिकों ने पाया कि सामान्य मरीजों की तुलना में उसके शरीर में वायरस का स्तर काफी कम था। तीन साल तक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) लेने के बाद उसके शरीर में एचआईवी का सक्रिय भंडार लगभग खत्म हो गया। स्पेन के बार्सिलोना के आईडीआईबीएपीएस और हॉस्पिटल क्लीनिक डी बार्सिलोना के वैज्ञानिकों ने मिलकर ये अध्ययन किया है। इसके मुताबिक इलाज शुरू होने के एक साल बाद मरीज के शरीर में वायरस का रिजर्वायर भी अन्य मरीजों की तुलना में 28 गुना कम पाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात रही कि तीन साल बाद वैज्ञानिकों को उसके शरीर में कोई भी सक्रिय और पूर्ण एचआईवी वायरस नहीं मिला।

एचआईवी को छिपने नहीं देती यह दवा : एचआईवी की सबसे बड़ी चुनौती है कि इलाज के बाद भी वायरस शरीर की कुछ कोशिकाओं में छिपा रहता है। मगर, इस अध्ययन में फिंगोलिमोड लेने वाले मरीज की कोशिकाओं से न सिर्फ वायरस खत्म हो गया बल्कि उसको दोबारा सक्रिय करना भी संभव नहीं हो पाया।
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