क्या लोकसभा सचिवालय से जुड़ा प्रश्न शाखा सांसदों की ओर से पूछे जाने वाले सवालों में अपनी तरफ से भी सवाल जोड़ देते हैं? बुधवार को उज्जैन और कोडरमा के सांसदों ने इस आशय का आरोप लगा कर सबको चौंका दिया। स्पीकर सुमित्रा महाजन ने तत्काल मामले का संज्ञान लेते हुए सांसदों से उनकी ओर से दिए गए मूल प्रश्न की कॉपी मांगी और व्यक्तिगत स्तर पर पूरे मामले को देखने की बात कही।
लोकसभा में संभवत: यह पहला अवसर है जब प्रश्न ब्रांच पर सदन के अंदर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं। दरअसल प्रश्नकाल में पहला सवाल रेलवे से संबंधित था। उज्जैन के सांसद ने जब अपने मूल प्रश्न को तोडने मरोडने का आरोप लगाया तो मामला उतना गंभीर नहीं लगा। तब स्पीकर ने भी उनके आरोपों को अनसुना किया।
मगर जब इसी सवाल से जुड़े दूसरे सांसद रवींद्र कुमार राय ने भी यही आरोप लगाए तो स्पीकर ने इसका तत्काल संज्ञान लिया। राय ने जब यह कहा कि उन्होंने अपना और साथी सांसद का मूल प्रश्न देखा है। इसके बाद वह कह रहे हैं कि इसमें कुछ सवाल और मुद्दे ऐसे है जिसे दोनों में से किसी सांसद ने नहीं पूछा।
राय ने यहां तक कहा कि कुछ कर्मचारी सांसदों के मुंह से दूसरे सांसदों के खिलाफ कुछ बुलवाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी बातें सांसदों के मुंह से कहलवाना चाहते हैं। इसकेबाद स्पीकर ने कहा कि वह दोनों मूल प्रश्न को निकलवा कर खुद ही इसकी जांच करेंगी। गौरतलब है कि इससे पहले पैसे ले कर सवाल पूछने के आरोप में कई सांसदों को अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी थी।