बीते सील नवंबर में मोदी सरकार ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य लोगों को लॉकर्स और घरों में बंद सोने को बाहर निकाल कर उसे डिपॉजिट स्कीम के रूप में बदलने के लिए प्रोत्साहित करना था जिससे की स्वर्ण के आयात पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सके और घरेलू मांग देश में ही उपलब्ध सोने से पूरी की जा सके। यह योजना जब शरू हुई थी तो सांसदों ने इस योजना की खूब तारीफ की थी, लेकिन हकीकत में सांसद इस योजना में अब तक निवेश करने से बचते रहें हैं।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के चुनाव पुर्व दिए गए हलफनामे के मुताबिक इनके पास कुल मिलाकर 710 किलो सोना है। लेकिन अभी तक इनमें से किसी ने भी सरकार की स्वर्ण मुद्रीकरण योजना में निवेश नहीं किया है।
सरकार के मुताबिक देश में 20 हजार से भी ज्यादा सोमा मौजूद है। आज देश में 20 हजार टन से भी ज्यादा सोना मौजूद है। लेकिन फिर भी सोने के प्रति लोगों के आकर्षण में कोई कमी नहीं आ रही। सोने की इस आकर्षण के कारण देश में बड़ी मात्रा में सोने का आयात होता है।