हिला अपराध के आरोपी 19 सांसद और 126 विधायक सदन में पहुंचे तो इसकी बड़ी वजह रही कि पांच वर्ष में विभिन्न राजनीतिक दलों ने जानबूझकर 572 आरोपियों को लोकसभा व विधानसभा चुनाव के टिकट दिए। इनमें 89 आम चुनाव और 321 विधानसभा चुनाव के लिए थे। वहीं 410 प्रत्याशी मान्यता प्राप्त दलों से थे और 162 निर्दलीय। लोकसभा का टिकट पाने वाले आरोपियों की संख्या में 2009 से 2019 में 231 प्रतिशत वृद्धि हुई।
महिला नेतृत्व वाली पार्टियों ने भी दिए आरोपियों को टिकट :
राजनीतिक दल किसी व्यक्ति को अपनी पार्टी का चुनाव टिकट देते समय इस बात की परवाह नहीं करते कि उस व्यक्ति पर महिला अपराध के आरोप हैं। बीते पांच वर्ष में सबसे ज्यादा 66 आरोपियों को टिकट भाजपा ने दिए। कांग्रेस ने 46, बसपा ने 40, तृणमूल ने सात ऐसे प्रत्याशी चुने। खास बात है कि इन तीनों पार्टी की मुखिया महिला हैं। माकपा 15, शिवसेना 13, सपा 13, भाकपा व वाईएसआरसीपी 9, आप 8, बीजद 7 और टीआरएस 6 आरोपियों को टिकट दे चुकी है।
पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक :
पश्चिम बंगाल में महिला अपराध के सर्वाधिक 16 आरोपी सांसद-विधायक चुने गए। इसके बाद ओडिशा व महाराष्ट्र 12, आंध्रप्रदेश 8, तेलंगाना 5 रहे। एमपी, यूपी, उत्तराखंड व केरल से तीन-तीन और बिहार, गुजरात, झारखंड व तमिलनाडु से दो-दो आरोपी चुने गए।
सबसे ज्यादा 21 आरोपी सांसद व विधायक भाजपा के टिकट पर जीते। कांग्रेस से 16, वाईएसआरसीपी से 7, बीजद से 6, तृणमूल कांग्रेस 5, टीआरएस 4, निर्दलीय 3, द्रमुक 2, एनसीपी 2, राजद 2 और शिवसेना 2 आरोपी सदन पहुंचे। माकपा, झामुमो, पीजेपी, आरएसपी, सपा और टीडीपी ने 1-1 आरोपियों को सदन पहुंचाया।
आरोप : इस प्रकार के अपराध किए :
इन सांसदों विधायकों पर महिलाओं पर दुष्कर्म (आईपीसी 376), जबरदस्ती विवाह के लिए अपहरण या बंधक बनाने (आईपीसी 366), दुष्कर्म के प्रयास में बल प्रयोग (आईपीसी 354), पति या उसके संबंधियों द्वारा हिंसा (आईपीसी 498ए), वेश्यावृत्ति के लिए नाबालिग की खरीद (आईपीसी 373) और भद्दे इशारों, शब्दों या किसी गतिविधि से महिलाओं के अपमान (आईपीसी 509) जैसे आरोप हैं।