राज्यसभा में कामकाज के घटते समय से चिंतित सांसदों ने सदन के कामकाजी दिन बढ़ाकर 120 करने की मांग की है। इसके साथ ही सांसदों का कहना है कि सदन की कार्यवाही का समय भी बढ़ाया जाए और 11 बजे की बजाय सदन का कामकाज सुबह 10 बजे से शुरू किया जाए।
कुछ सदस्यों ने सदन में व्यवधान और बार-बार स्थगन को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कामकाज के घंटों में कमी के लिए या तो सदन का समय बढ़ाया जाए या सत्र को ज्यादा दिनों तक चलाकर उसकी भरपाई की जाए।
शिरोमणि अकाली दल के सदस्य नरेश गुजराल द्वारा लाए गए प्राइवेट मेंबर बिल पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने अपनी राय व्यक्त की। कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि हंगामा करने वाले सदस्यों के उस दिन के वेतन-भत्ते काटे जाएं।
बिल पेश करते हुए गुजराल ने कहा, ‘हम लगातार देखते आ रहे हैं और अब तो संसद में साल में बमुश्किल 70 दिन ही बैठक हो पाती है।’ आजादी के बाद 1952 में जब राज्यसभा की बैठक शुरू हुई, तब साल में 100 दिन तक कार्यवाही चलती थी।