कमलनाथ-शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)
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मध्यप्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि शाम पांच बजे तक बहुमत परीक्षण की पूरी प्रक्रिया खत्म कर ली जाए। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि बागी विधायक विधानसभा आना चाहते हैं तो कर्नाटक और मध्यप्रदेश के डीजीपी को उन्हें सुरक्षा देनी होगी। अदालत ने बहुमत परीक्षण की वीडियोग्राफी भी कराने को कहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि राज्य की विधानसभा में मौजूदा दलीय स्थिति क्या है।
इससे पहले रंगपंचमी के दिन विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कांग्रेस के छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। इसके बाद शुक्रवार शाम को 16 अन्य विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए हैं। लेकिन 22 इस्तीफे स्वीकार होने के बाद सदन में कांग्रेस की सदस्य संख्या 114 से घटकर 92 रह गई है। हालांकि कांग्रेस सरकार को सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। जिसके बाद सदन में उसके पास 99 विधायकों का समर्थन है।
मध्यप्रदेश विधानसभा की दलीय स्थिति और बहुमत के लिए आवश्यक सदस्य संख्या
20 मार्च को संख्या बल
कांग्रेस: 92
भाजपा: 107
बसपा: 2
सपा: 1
निर्दलीय: 4