भोपाल जेल से भागे कैदियों को मुठभेड़ में मार गिराने की घटना पर उठ रहे सवालों को मध्य प्रदेश पुलिस ने यह कहकर खारिज किया कि आत्मसमर्पण करने के बजाय उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) योगेश चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि उनकी जबर्दस्त फायरिंग के जवाब में पुलिस को 45-46 राउंड गोलियां चलानी पड़ी जिसमें सभी आतंकी मारे गए।
चौधरी ने बताया कि सिमी के ये सभी आतंकी सोमवार को तड़के भोपाल सेंट्रल जेल से भागे थे और उन्होंने गार्ड का गला रेत दिया था। उन्होंने कहा कि इस मुठभेड़ पर उठ रहे सभी सवालों की जांच कराने के बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। ये सभी खतरनाक अपराधी थे जिन्होंने 2008 और 2011 में खंडवा के दो कांस्टेबल की हत्या भी की थी। इनमें से तीन आतंकी तो 2013 में खंडवा जेल से भागने में भी कामयाब रहे थे। एक फुटेज में एक शांत पड़े आतंकी पर बहुत नजदीक से एक जवान द्वारा गोली चलाए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘हम पूरे दिन कार्रवाई करते रहे। वीडियो देखने के बाद ही इसकी सत्यता का पता चल पाएगा। लेकिन ये सभी कई गंभीर अपराध में लिप्त अपराधी थे। इस अभियान में हमने स्पेशल टास्क फोर्स और सीटीजी की संयुक्त कार्रवाई की।’
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि आतंकियों के पास कोई हथियार नहीं था, इस बारे में पूछे जाने पर आईजी ने कहा कि नियमों के अनुसार इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और इन बातों का भी ख्याल रखा जाएगा। इन आतंकियों ने ऊंचे स्थान से पुलिस कर्मियों पर हमला किया और उनके साथ हाथापाई भी हुई। हालांकि किसी आतंकी के पास से मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जेल से भागने के बाद उनके पास हथियार कहां से आए, क्या किसी बाहरी तत्व से भी उन्हें मदद मिल रही थी, इन सभी बिंदुओं पर जांच कराई जाएगी।