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MP News: भाजपा के बागियों को साथ जोड़ने के बाद भी क्यों खुश नहीं है कांग्रेस, पार्टी को सता रहा यह डर

सार

MP News: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहे हैं। इससे ठीक पहले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच से बगावत के सुर भी बुलंद होने लगे हैं। प्रदेश के कुछ बड़े नेता सार्वजनिक मंचों से खुलकर पार्टी और कुछ नेताओं की आलोचना भी करते हुए नजर आ रहे हैं। इसी का फायदा कांग्रेस पार्टी उठा रही है...
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MP News - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल की सियासत शुरू हो गई है। अपनी पार्टी से नाराज नेता-कार्यकर्ता अब दूसरी पार्टियों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार सत्ताधारी भाजपा में सेंध लगा रही है। आए दिन पार्टी में पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री कांग्रेस का हाथ थाम रहे हैं। हालांकि, भाजपा में सेंध लगाने के बाद भी कांग्रेस ज्यादा उत्साहित नहीं है। कांग्रेस को विश्वास है कि भाजपा भी जरूर पलटवार करेगी। भाजपा के पलटवार के अंदेशे से कांग्रेस के सभी नेता अलर्ट पर हैं और अपनी ही पार्टी के नेताओं से सतत संपर्क बनाए हुए हैं।

यह भी पढ़ें: Mission 2024: हरियाणा के दो सांसदों का टिकट काटेगी भाजपा! लोकसभा चुनाव में पार्टी उतार सकती है पांच नए चेहरे

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहे हैं। इससे ठीक पहले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच से बगावत के सुर भी बुलंद होने लगे हैं। प्रदेश के कुछ बड़े नेता सार्वजनिक मंचों से खुलकर पार्टी और कुछ नेताओं की आलोचना भी करते हुए नजर आ रहे हैं। इसी का फायदा कांग्रेस पार्टी उठा रही है। राज्य में भाजपा को सबसे तगड़ा झटका तब लगा, जब पूर्व मुख्यमंत्री और जन संघ संस्थापकों में से एक कैलाश जोशी के पुत्र और तीन बार विधायक रह चुके दीपक जोशी ने कांग्रेस का हाथ थामा।

पूर्व मंत्री जोशी के साथ दतिया के पूर्व विधायक राधेलाल बघेल भी कांग्रेस में शामिल हुए। प्रदेश में दीपक जोशी का भी मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 2018 के विधानसभा के चुनावों में उन्हें कांग्रेस के मनोज चौधरी ने हरा दिया था। लेकिन बाद में चौधरी ज्योतिरादित्य के उस समूह में शामिल थे, जिसने कांग्रेस को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था और प्रदेश में कमलनाथ की सरकार को गिरा दिया था। जोशी की शिकायत ये भी थी कि उन्हें राज्य इकाई से महत्व मिलना बंद हो गया था।

अभी तेज होगा नेताओं के दल बदलने का दौर

विधानसभा चुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का इस तरह से भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होना भाजपा के लिए आने वाले समय में मुश्किल खड़ी कर सकता है। दरअसल जब इस तरह से किसी पार्टी के नेता दल छोड़ते हैं, तो चुनाव से पहले उस पार्टी के लिए नकारात्मक माहौल बनता है। प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे नेताओं के दल बदलने का सिलसिला तेज होगा। भाजपा को फिलहाल संगठन के असंतुष्ट नेताओं से निपटना होगा। अगर पार्टी इन्हें मनाने में सफल नहीं होती है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर जरूर नजर आएगा।

राजनीतिक विश्लेषक और लेखक राशिद किदवई कहते हैं कि पहली बार भाजपा के सामने कांग्रेस के अलावा अपने ही असंतुष्ट नेता चुनौती बने हुए हैं। पिछले कई सालों से भाजपा शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर चुनाव लड़ती रही है। वही मुख्यमंत्री बनते आए हैं। अब उन्हें सत्ता विरोधी लहर का सामना भी करना पड़ेगा। पिछले विधानसभा के चुनावों में जनादेश उनके साथ नहीं था। पिछली बार मध्यप्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता सौंपी थी। अब फिर चुनाव आ गए हैं। इसलिए दोनों दलों के बीच छीना झपटी का माहौल शुरू हो गया है। कुछ नेता भाजपा छोड़ कर जा रहे हैं, कुछ जाने वाले हैं। यूं समझिए जैसे प्रवासी पक्षियों के साथ होता है जो एक ख़ास मौसम में प्रवास पर निकल जाते हैं। वैसे ही चुनाव में भी प्रवासी नेताओं का दौर शुरू हुआ है।

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कांग्रेस को है पलटवार का अंदेशा

कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद अमर उजाला से बातचीत में कहते है कि दो महीने के अंदर कांग्रेस ने भाजपा में बड़ी सेंध लगाई है। इस दौरान भाजपा के कई बड़े नेताओं ने भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थामा है। इन नामों में सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री 8 बार के विधायक और पूर्व सांसद कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी का नाम शामिल हैं। भाजपा में सेंध लगाने के बाद कांग्रेस भी उत्साहित नहीं है। क्योंकि कांग्रेस को अंदेशा है कि अब भाजपा भी पलटवार करते हुए सेंध लगाने का प्रयास करेगी। जिसके चलते पूरी कांग्रेस अलर्ट पर है। वरिष्ठ नेता अपनी पार्टी के सभी नेताओं से सतत संपर्क बनाए हुए हैं।  

इनके भी तेवर ठीक नहीं

मध्यप्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला को बताया कि भाजपा की 127 सीटों में से 18 ऐसी हैं जिन पर कांग्रेस से इस्तीफा देकर आए विधायक काबिज हैं। नौ सीटें वे हैं जिन पर कांग्रेस से आए नेता उपचुनाव हारने के बाद फिर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इन सभी सीटों पर भाजपा के सामने आंतरिक असंतोष को साधना एक बड़ी चुनौती बन गई है। इन सीटों पर चुनाव में एक बार फिर सिंधिया समर्थकों को टिकट दिया गया, तो पुराने नेताओं का राजनीतिक भविष्य संकट में पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिन भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। क्योंकि कई ऐसे नेताओं के नाम सामने आने लगे हैं, जो कांग्रेस के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

  • भाजपा में अभी कुछ और ऐसे नेता हैं। जिनके तेवर ठीक नहीं लग रहे हैं इन नेताओं में भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन भी शामिल हैं। बीते कुछ दिनों से वरिष्ठ नेता सत्तन अपनी ही पार्टी पर लगातार मुखर हो रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात की है।
  • दूसरे नंबर पर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, अपेक्स बैंक के पूर्व अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत भी शामिल हैं। समय रहते भाजपा ने इन्हें मैनेज नहीं किया, तो ये नेता भी भाजपा के हाथ से निकल सकते हैं।
  • भोपाल से आने वाले दो कद्दावर नेता जो शिवराज सरकार में राजस्व, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और वन-योजना अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी मंत्रालय का जिम्मा संभाल चुके हैं। वे भी पार्टी से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं।
  • शिवराज सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहे एक वरिष्ठ नेता और चौहान के बेहद करीबियों में गिने जाने वाले पांच बार के विधायक और एक बार के सांसद भी पार्टी से नाराज चल रहे हैं।
  • प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे एक कद्दावर नेता भी इन दिनों पार्टी में पूछ न होने से असंतुष्ट हैं।
  • एक बड़े कांग्रेस नेता को हराकर संसद पहुंचे वाले एक सांसद भी इन दिनों पार्टी के नेताओं से नाराज हैं। सांसद कई बार अपना दर्द दिल्ली दरबार तक पहुंचा चुके हैं।
  • इंदौर से ताल्लुक रखने एक ब्राह्मण नेता जो प्रदेश के सीएम से लेकर देश के गृह मंत्री अमित शाह के दरबार में दखल रहते हैं। उन्हें भी इस बात का मलाल है कि इन दिनों पार्टी में जानकार और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है।
  • पूर्व विधायक और केंद्र की अटल सरकार में मंत्री पद संभाल चुके एक नेता भी पार्टी से निराश हैं। कई बार वे सीएम और प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर चुके हैं। इस बार भी उनकी पत्नी टिकट की दावेदार है।
  • शिवराज सरकार में अहम मंत्रालय संभाल चुकीं आदिवासी महिला विधायक भी पार्टी में तवज्जो नहीं मिलने से नाराज हैं।
  • सीधी जिले के कद्दावर ब्राह्मण नेता और चार बार के विधायक पार्टी से नाराज हैं। वे इस बार मंत्री के रेस में भी थे लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया।

हर दिन भाजपा से नाराज होकर कांग्रेस जा रहे नेता

  • मई में दीपक जोशी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी का कांग्रेस में विलय हुआ। प्रसपा के अध्यक्ष कमल सिंह चौहान अपने 1500 समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे।
  • इसके अलावा सेवढ़ा से पूर्व विधायक राधेलाल बघेल भी कांग्रेस के साथ हो लिए। बघेल ने अपनी राजनीति की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। वर्ष 2008 में वे दतिया जिले की सेवढ़ा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2013 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रहे बघेल 2018 में भाजपा के टिकट पर चुनाव हार गए थे।
  • मई में ही बालाघाट से भाजपा की पूर्व विधायक अनुभा मुंजारे, उनके पुत्र शांतनु मुंजारे, हरदा में युवा नेता दीपक सारण समेत कई नेताओं ने कांग्रेस का हाथ थामा। सारण कृषि मंत्री कमल पटेल करीबी रहे हैं। उनके साथ पूर्व विधायक आरके दोगने और जिलाध्यक्ष ओम पटेल, किसान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष केदार सिरोही भी मौजूद रहे। दीपक करीब 15 साल से भाजपा में थे। मंत्री पटेल की कोर टीम ही बूथ पर बैठने से लेकर चुनाव संचालन की पूरी जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली थी।
  • इसके अलावा सागर से भाजपा विधायक प्रदीप लारिया के भाई हेमंत लारिया भी कांग्रेस में शामिल हुए। सतना से पूर्व मंत्री सईद अहमद ने फिर कांग्रेस का दामन थामा हैं। सईद दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री थे। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। अब उनकी घर वापसी हुई है।
  • हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाने वाले राकेश गुप्ता भाजपा छोड़ फिर कांग्रेसी हो गए। गुप्ता अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी में शामिल हुए। राकेश गुप्ता एक प्रमुख कांग्रेस परिवार से आते हैं और मार्च 2020 में सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। इससे पहले सिंधिया के एक और करीबी बैजनाथ यादव ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था।
  • कटनी जिले के भाजपा से विधायक रह चुके ध्रुव प्रताप सिंह और कद्दावर नेता शंकर महतो ने भी हाल ही में कांग्रेस जॉइन कर ली। ध्रुव कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से विधायक रह चुके हैं। जबकि शंकर महतो बहोरीबंद के कद्दावर नेता में गिने जाते हैं।
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