मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल की सियासत शुरू हो गई है। अपनी पार्टी से नाराज नेता-कार्यकर्ता अब दूसरी पार्टियों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार सत्ताधारी भाजपा में सेंध लगा रही है। आए दिन पार्टी में पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री कांग्रेस का हाथ थाम रहे हैं। हालांकि, भाजपा में सेंध लगाने के बाद भी कांग्रेस ज्यादा उत्साहित नहीं है। कांग्रेस को विश्वास है कि भाजपा भी जरूर पलटवार करेगी। भाजपा के पलटवार के अंदेशे से कांग्रेस के सभी नेता अलर्ट पर हैं और अपनी ही पार्टी के नेताओं से सतत संपर्क बनाए हुए हैं।
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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहे हैं। इससे ठीक पहले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच से बगावत के सुर भी बुलंद होने लगे हैं। प्रदेश के कुछ बड़े नेता सार्वजनिक मंचों से खुलकर पार्टी और कुछ नेताओं की आलोचना भी करते हुए नजर आ रहे हैं। इसी का फायदा कांग्रेस पार्टी उठा रही है। राज्य में भाजपा को सबसे तगड़ा झटका तब लगा, जब पूर्व मुख्यमंत्री और जन संघ संस्थापकों में से एक कैलाश जोशी के पुत्र और तीन बार विधायक रह चुके दीपक जोशी ने कांग्रेस का हाथ थामा।
पूर्व मंत्री जोशी के साथ दतिया के पूर्व विधायक राधेलाल बघेल भी कांग्रेस में शामिल हुए। प्रदेश में दीपक जोशी का भी मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 2018 के विधानसभा के चुनावों में उन्हें कांग्रेस के मनोज चौधरी ने हरा दिया था। लेकिन बाद में चौधरी ज्योतिरादित्य के उस समूह में शामिल थे, जिसने कांग्रेस को छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था और प्रदेश में कमलनाथ की सरकार को गिरा दिया था। जोशी की शिकायत ये भी थी कि उन्हें राज्य इकाई से महत्व मिलना बंद हो गया था।
अभी तेज होगा नेताओं के दल बदलने का दौर
विधानसभा चुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का इस तरह से भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होना भाजपा के लिए आने वाले समय में मुश्किल खड़ी कर सकता है। दरअसल जब इस तरह से किसी पार्टी के नेता दल छोड़ते हैं, तो चुनाव से पहले उस पार्टी के लिए नकारात्मक माहौल बनता है। प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे नेताओं के दल बदलने का सिलसिला तेज होगा। भाजपा को फिलहाल संगठन के असंतुष्ट नेताओं से निपटना होगा। अगर पार्टी इन्हें मनाने में सफल नहीं होती है, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर जरूर नजर आएगा।
राजनीतिक विश्लेषक और लेखक राशिद किदवई कहते हैं कि पहली बार भाजपा के सामने कांग्रेस के अलावा अपने ही असंतुष्ट नेता चुनौती बने हुए हैं। पिछले कई सालों से भाजपा शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर चुनाव लड़ती रही है। वही मुख्यमंत्री बनते आए हैं। अब उन्हें सत्ता विरोधी लहर का सामना भी करना पड़ेगा। पिछले विधानसभा के चुनावों में जनादेश उनके साथ नहीं था। पिछली बार मध्यप्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता सौंपी थी। अब फिर चुनाव आ गए हैं। इसलिए दोनों दलों के बीच छीना झपटी का माहौल शुरू हो गया है। कुछ नेता भाजपा छोड़ कर जा रहे हैं, कुछ जाने वाले हैं। यूं समझिए जैसे प्रवासी पक्षियों के साथ होता है जो एक ख़ास मौसम में प्रवास पर निकल जाते हैं। वैसे ही चुनाव में भी प्रवासी नेताओं का दौर शुरू हुआ है।
कांग्रेस को है पलटवार का अंदेशा
कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद अमर उजाला से बातचीत में कहते है कि दो महीने के अंदर कांग्रेस ने भाजपा में बड़ी सेंध लगाई है। इस दौरान भाजपा के कई बड़े नेताओं ने भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थामा है। इन नामों में सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री 8 बार के विधायक और पूर्व सांसद कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी का नाम शामिल हैं। भाजपा में सेंध लगाने के बाद कांग्रेस भी उत्साहित नहीं है। क्योंकि कांग्रेस को अंदेशा है कि अब भाजपा भी पलटवार करते हुए सेंध लगाने का प्रयास करेगी। जिसके चलते पूरी कांग्रेस अलर्ट पर है। वरिष्ठ नेता अपनी पार्टी के सभी नेताओं से सतत संपर्क बनाए हुए हैं।
इनके भी तेवर ठीक नहीं
मध्यप्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला को बताया कि भाजपा की 127 सीटों में से 18 ऐसी हैं जिन पर कांग्रेस से इस्तीफा देकर आए विधायक काबिज हैं। नौ सीटें वे हैं जिन पर कांग्रेस से आए नेता उपचुनाव हारने के बाद फिर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इन सभी सीटों पर भाजपा के सामने आंतरिक असंतोष को साधना एक बड़ी चुनौती बन गई है। इन सीटों पर चुनाव में एक बार फिर सिंधिया समर्थकों को टिकट दिया गया, तो पुराने नेताओं का राजनीतिक भविष्य संकट में पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिन भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। क्योंकि कई ऐसे नेताओं के नाम सामने आने लगे हैं, जो कांग्रेस के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
हर दिन भाजपा से नाराज होकर कांग्रेस जा रहे नेता