यूजीसी के संसदीय नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार का किसी से सलाह-मशविरा न करने का रवैया उसके हर फैसले में दिखाई देता है। सिब्बल ने चेतावनी दी कि समाज के किसी भी वर्ग को नजरअंदाज करना देश के भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
क्या हैं यूजीसी के नए नियम?
13 जनवरी को अधिसूचित इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को भेदभाव की शिकायतों की जांच और समानता बढ़ाने के लिए 'संसदीय कमेटी' बनाना अनिवार्य किया गया है। इन समितियों में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान है। ये नियम 2012 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह लाए गए हैं, जो केवल सलाहात्मक प्रकृति के थे।
छात्रों का विरोध के बीच सरकार का आश्वासन
कई राज्यों में छात्र संगठनों ने इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए हैं। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने भी माना है कि याचिकाओं में कानून से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं।