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टीएमसी सांसद का इस्तीफा: जानें कौन हैं दिनेश त्रिवेदी, जिनके कहने पर बदल गई थी फिल्म की स्क्रिप्ट

Fri, 12 Feb 2021 04:11 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टीएमसी सांसद दिनेश त्रिवेदी - फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार झटके मिल रहे हैं। ममता बनर्जी को शुक्रवार उस वक्त सबसे बड़ा झटका लगा, जब टीएमसी के राज्यसभा सांसद और ममता के करीबी माने जाने वाले दिनेश त्रिवेदी ने सदन की कार्यवाही के दौरान इस्तीफा दे दिया। जानते हैं कि कौन है दिनेश त्रिवेदी, जिन्होंने रेलमंत्री रहते हुए फिल्म की शूटिंग के लिए बदलवा दी थी स्क्रिप्ट और ममता पर आरोप लगाकर बदल दी राजनीतिक पटकथा... 

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टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी के गुजराती माता-पिता विभाजन के बाद दिल्ली आकर बस गए थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के एक बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई की और उसके बाद कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक किया। टेक्सॉस विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई कर चुके दिनेश त्रिवेदी के पास व्यावसायिक पायलट का भी लाइसेंस है। कुछ वक्त विदेश में नौकरी भी की, लेकिन जल्द ही देश की माटी की खुशबू उन्हें स्वदेश ले आई।

 


1980 में रखा था राजनीति में कदम 
गुजराती परिवार में जन्मे और कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक करने वाले दिनेश त्रिवेदी ने वर्ष 1980 में कांग्रेस पार्टी के जरिये राजनीति में कदम रखा था। लेकिन वर्ष 1990 में वह जनता दल में चले गए और जब साल 1998 में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाई तो दिनेश त्रिवेदी उनके साथ हो लिए। ममता ने उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया था। 

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ममता का भरोसा जीत 2001 में पहुंचे थे राज्यसभा 

वर्ष 2001-2006 के बीच दिनेश त्रिवेदी ने ममता बनर्जी का जबर्दस्त विश्वास हासिल किया। बता दें कि ममता के राजनीतिक जीवन का यह सबसे बुरा दौर था। वर्ष 2001 में ममता ने उन्हें राज्य सभा भेजा। यहां भी दिनेश त्रिवेदी ने अपने राजनीतिक दिमाग का लोहा मनवाया और पार्टी के मात्र 60 विधायकों के बावजूद त्रिवेदी राज्यसभा के लिए अपनी जीत सुनिश्चित करने में कामयाब रहे। 

कभी दिल्ली में ममता के समर्थन में बनाया था माहौल 
वर्ष 2006 में जब ममता बनर्जी सिंगुर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 26 दिन लंबी भूख हड़ताल पर बैठी थीं, उस वक्त त्रिवेदी दिल्ली में उनके समर्थन में माहौल बना रहे थे। इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी उनके साथ खड़े थे, लेकिन ममता बनर्जी का उन पर विश्वास उस वक्त बढ़ा, जब साल 2009 में त्रिवेदी ने सीपीएम के कद्दावर नेता तड़ित तोपदार को सीपीएम और सीटू के गढ़ कहे जाने वाली बैरकपुर संसदीय सीट पर जबरदस्त मात दी। दिनेश त्रिवेदी की इस सफलता से गदगद ममता ने कहा था कि यह दिनेश दा की जीत है। उस वक्त दिनेश त्रिवेदी जॉर्ज फर्नांडिज और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ममता के संपर्कों के लिए सेतु का काम करते थे। 
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ममता ने रेलमंत्री पद से कराया था बर्खास्त

त्रिवेदी ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी निभाई और समय-समय पर ममता बनर्जी ने उन्हें इसका इनाम भी दिया। वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद जब ममता बनर्जी ने राज्य की राजनीति की ओर रुख किया तो केंद्रीय रेल मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी त्रिवेदी को सौंप दी। जब त्रिवेदी ने रेल किराया बढ़ाया तो उनका विरोध होने लगा।

ऐसे में दिनेश त्रिवेदी ने कह दिया कि रेल मंत्रालय रॉयटर्स बिल्डिंग से नहीं, बल्कि रेल भवन से चलता है। ममता बनर्जी उनके इस बागी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर पाईं और तत्कालीन प्रधानमंत्री से सिफारिश कर उन्हें रेलमंत्री के पद से बर्खास्त करा दिया। त्रिवेदी ने अपने रेलमंत्री पद पर रहने के दौरान भारत में हाईस्पीड पैसेंजर ट्रेनें शुरू करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, उसके कुछ दिनों बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ गया था। 

रेल मंत्री ने कहा ... और बदल गई स्क्रिप्ट 
दिनेश त्रिवेदी ने वर्ष 2011 में जेम्स बॉन्ड की फिल्म स्काईफॉल की स्क्रिप्ट बदलवा दी थी। दरअसल, इस फिल्म की कुछ शूटिंग भारतीय रेलगाड़ी पर होनी थी। जब त्रिवेदी को पता चला कि स्क्रिप्ट के मुताबिक दृश्य को ट्रेन की छत पर फिल्माया जाना है, इसके बाद उन्होंने जोर देकर स्क्रिप्ट बदलवाई थी। त्रिवेदी ने कहा था कि फिल्म में लोगों को ट्रेन की छत पर यात्रा करते हुए नहीं दिखाया जाना चाहिए। यह गैरकानूनी है।
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