गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के नेता शशि थरूर पर 51 करोड़ रुपये की गर्लफ्रेंड का ताना कसा था। इसी तरह से तमाम भाजपा के नेताओं ने समय-समय पर महिलाओं के विरुद्ध तंग करने वाली टिप्पणी की है। ग्वालियर चंबल संभाग से लेकर मध्यप्रदेश के अन्य हिस्सों में इस तरह के वक्तव्य वाले वीडियो व्हाट्सएप आदि के जरिए खूब प्रसारित किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर मामला तुम्हारी चादर मेरी चादर से अधिक गंदी का ही है।
कांग्रेस के लिए तीन मुद्दे बड़े अहम हैं चुनाव में
- बिजली बिल में कटौती
- संविदा भर्ती का नियमितीकरण
- हमने कौन सा पाप किया जो काम करने का मौका नहीं मिला?
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तीन मुद्दे बड़े उत्साह से उठाते हैं। इन तीन मुद्दों पर जनता तालियां भी खूब बजाती है। मध्यप्रदेश में 100 रुपये में 100 यूनिट बिजली की योजना के कारण लोगों के बिजली के बिल काफी कम आने लगे थे। दूसरा वादा कमलनाथ संविदा पर हुई भर्तियों को नियमित करने का वादा कर रहे हैं। उनके इस वादे पर जनता कुछ विश्वास करती दिखाई देने लगती है। कमलनाथ एक बात और कहते हैं। वह कहते हैं कि आखिर उन्होंने कौन सा पाप किया था जो 15 महीने के भीतर उनकी सरकार गिरा दी गई। वह केवल 11 महीने ही काम कर पाए। उन्हें आखिर क्यों काम करने का अवसर नहीं दिया गया?
13 अक्तूबर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर के महाराज और भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मंच साझा नहीं कर रहे हैं। जबकि ग्वालियर चंबल संभाग ज्योतिरादित्य सिंधिया का क्षेत्र है और उन्हीं के साथ भाजपा में गए नेता प्रत्याशी हैं। सिंधिया की न तो डिजिटल रथ पर तस्वीर है और न ही प्रचार की होर्डिंग आदि में। राकेश पाठक कहते हैं कि कभी कांग्रेस में रहने के दौरान सिंधिया की फोटो छोटी हो जाने पर दिल्ली से बड़े नेताओं के फोन आ जाते थे। आज सिंधिया की पूरी पिक्चर ही नदारद है। कुछ तो है।
कहीं इसके कारण ये तो नहीं?
- राकेश पाठक कहते हैं कि देश कभी वफादारी खोने वाले को माफ नहीं करता। रामायण के पात्र विभीषण को देख लीजिए। वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद उन्हें गद्दार के तौर पर प्रचारित करना शुरू किया। खूब किया। नारे भी लगे। ज्योतिरादित्य ने कमलनाथ की सरकार गिराने को लेकर तरह-तरह की सफाई भी दी है, लेकिन जनता को उनकी सफाई हजम नहीं हो रही है।
- दूसरा बड़ा कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुरानी सरकार से नाराजगी बताई जा रही है। भिंड के सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि जनता ने 15 साल की सरकार को बदला था, लेकिन 15 महीने बाद फिर वही सरकार सत्ता में आ गई।
- बताते हैं संघ और भाजपा ने कई दौर का सर्वेक्षण कराया है। इसमें जनता की ज्योतिरादित्य सिंधिया से नाराजगी की खबरें हैं। दूसरे क्षेत्र के भाजपा नेताओं को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके साथ आए नेताओं से अपने राजनीतिक भविष्य पर खतरा दिखाई पड़ रहा है। कहीं न कहीं प्रकाश झा, नरोत्तम मिश्रा, जयभवान सिंह पवैया, लाल सिंह जैसे नेताओं को कुछ जरूर चुभ रहा होगा। सूत्रों के अनुसार इन्हीं कारणों से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सिंधिया के साथ मंच साझा करने में कुछ परहेज किया है।
ग्वालियर चंबल संभाग के ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश के युवाओं में ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक छवि है। सिंधिया अच्छे वक्ता हैं। पूरे सब्जबाग और लाव लश्कर को बनाकर रखते हैं। दतिया, ग्वालियर, चंबल, भिंड, मुरैना समेत दर्जन भर जिलों में अपनी खास छवि के लिए जाने जाते हैं। पिता माधवराव सिंधिया से राजनीति की विरासत को भी उन्होंने बखूबी संभाल रखा है। मध्यप्रदेश सरकार की 28 साल से सेवा करके रिटायर हुए आशीष त्रिपाठी का कहना है कि सिंधिया में कुछ तो है। तभी तो एक इशारे पर 16 विधायकों ने बिना करियर की परवाह किए भाजपा का दामन थाम लिया था। आशीष कहते हैं कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। उनके समर्थक हैं और भाजपा में जाने के बाद इससे भाजपा की क्षेत्र में पकड़ मजबूत हुई है।