आईसीएमआर और राष्ट्रीय पोषण संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, 2009 से 2023 के बीच जंक फूड की बिक्री 150 फीसदी बढ़ी है। जिससे देश में मोटापे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।
देश में जंक फूड की बढ़ती खपत अब सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। पिछले कुछ वर्षों में जंक फूड की बिक्री में 150 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) की अगुवाई वाले विशेषज्ञ समूह ने बच्चों और किशोरों को जंक फूड से बचाने के लिए कई अहम नीतिगत सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट जारी की है।
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रिपोर्ट में कौन-कौन से बड़े सुझाव दिए गए हैं?
रिपोर्ट में स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने, बच्चों को निशाना बनाकर किए जाने वाले विज्ञापनों पर सख्ती, खाद्य पैकेटों पर आसान और स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने तथा अधिक नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। सरकार इन सिफारिशों पर विचार करने के बाद आगे का फैसला ले सकती है।
भारत में जंक फूड की खपत कितनी तेजी से बढ़ी है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खपत लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2006 में इन उत्पादों की खुदरा बिक्री 0.9 अरब डॉलर थी, जो 2019 तक बढ़कर 37.9 अरब डॉलर पहुंच गई। वहीं 2009 से 2023 के बीच जंक फूड की बिक्री में करीब 150 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।
मोटापे को लेकर रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 23.5 फीसदी भारतीय अधिक वजन या मोटापे का शिकार हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 फीसदी से बढ़कर 27.3 फीसदी हो गया है, जबकि महिलाओं में यह 24 फीसदी से बढ़कर 30.7 फीसदी तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंक फूड की बढ़ती खपत इस समस्या के प्रमुख कारणों में से एक है।