राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और सशस्त्र सीमा बल के बीच हुए समझौते का उद्देश्य जवानों को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक कौशल प्रदान करना है। इस सहयोग के तहत आरआरयू, एसएसबी के सभी प्रशिक्षण संस्थानों को अकादमिक मान्यता देगा, जिससे जवानों को वैश्विक स्तर के प्रमाणपत्र और ज्ञान मिलेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) अकादमी ने शनिवार को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा प्रशिक्षण को मजबूत करना और सीमा सुरक्षा बल के संचालित विशेष पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक मान्यता शुरू करना है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक इस समझौता ज्ञापन पर दिल्ली स्थित एसएसबी मुख्यालय में हस्ताक्षर हुए। इस दौरान आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर कल्पेश एच वांद्रा, संबद्धता और मान्यता के डीन अविनाश खरेल और एसएसबी के महानिदेशक संजय सिंघल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह रणनीतिक साझेदारी एक औपचारिक ढांचा स्थापित करती है जिसके तहत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान आरआरयू, एसएसबी अकादमी में संचालित कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए अकादमिक मान्यता प्रदान करेगा।
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समझौते की शर्तों के तहत, दोनों संस्थानों ने संकाय विशेषज्ञता, शिक्षण उपकरण और विशेष प्रशिक्षण सुविधाओं सहित संसाधनों के व्यापक आदान-प्रदान के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा में अकादमिक अनुसंधान और सीमा सुरक्षा बलों की व्यावहारिक, जमीनी आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटना है।
इस कार्यक्रम के दौरान, प्रोफेसर कल्पेश एच वांद्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सहयोग से पहले ही अच्छे परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि आरआरयू ने हाल ही में एसएसबी अधिकारियों के लिए एक विशेष स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट पाठ्यक्रम आयोजित किया था। पेशेवर विकास के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए, आरआरयू अपने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और क्षेत्र-आधारित कार्यशालाओं के माध्यम से एसएसबी कर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।