18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में अन्य बिलों के साथ ही मोटर व्हीकल (संशोधन) बिल-2017 भी पास होने के लिए कतार में है। इस बिल को पास कराने के लिए सरकार पर सभी दलों के सांसदों का दबाव है।
दूसरा कारण, पिछले साल 1.14 लाख लोगों की सड़क हादसों में मौत होना भी है।केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे गैर सरकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन को भरोसा दिलाया है कि अगर संसद का सत्र शांतिपूर्वक चला तो मोटर वाहन संशोधन बिल को पास करा दिया जाएगा।
अगर यह बिल पास हो जाता है तो सड़क यातायात नियमों का उल्लंघन करना बहुत महंगा पड़ेगा। नए एक्ट में सौ रुपये का कोई चालान नहीं है, कम से कम पांच सौ से एक हजार रुपये तक की राशि का चालान प्रस्तावित है।
बता दें कि कई वर्षों से नए एक्ट पर काम चल रहा है। संशोधन के कई दौर पूरे होने के बाद पिछले साल मानसून सत्र में यह उम्मीद बंधी थी कि यह बिल पास हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
इस साल के बजट सत्र में भी इस बिल को पास कराने की बात कही गई थी, मगर पिछला संसद सत्र हंगामें की भेंट चढ़ने के कारण एक बार फिर यह बिल अधर में लटक गया।
लोकसभा इसे पहले ही अपनी मंजूरी दे चुकी है। सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे सेव लाइफ फाउंडेशन के सीईओ पीयूष तिवारी का कहना है कि हमनें विभिन्न पार्टियों के सांसदों से मुलाकात कर उनसे इस बिल को पास कराने का आग्रह किया है।
करीब पचास सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में टीआरएस के एपी जितेंद्र रेड्डी, बीजेडी की अर्का केसरी देव, शिवसेना के अरविंद सावंत, एआईएमआईएम के असाद्दुदीन ओवेसी, टीआरएस के बी.विनोद कुमार, आईएनएलडी के दुष्यंत चैटाला, टीआरएस की बलका सुमन, आईएनसी के.आर. धुर्वनारायणा व डॉ शशि थुरूर, एनसीपी की सुप्रिया सुले, एसएडी के नरेश गुजराल और डीएमके के तिरुचि शिवा आदि शामिल हैं।