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जानें, कैसे दी जाती है संत की उपाधि  

Sun, 04 Sep 2016 01:43 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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मदर टेरेसा - फोटो : Getty Images
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मदर टेरेसा ने जिन गरीबों और बेसहारों की सेवा की, उनके लिए वे जीवित संत थीं। वेटिकन में भी कई अनुयायी इससे सहमत हैं लेकिन कैथोलिक चर्च किसी को आसानी से संत की उपाधि नहीं देता। संत घोषित किए जाने की लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
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मदर टेरेसा को संत घोषित किए जाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से रविवार को पूरी हो जाएगी जब पोप फ्रांसिस उन्हें नया संत घोषित कर देंगे।

संत की उपाधि देने की प्रक्रिया की शुरुआत वहां से होती है, जहां उस महान व्यक्ति ने जीवन बिताया और जहां उसका निधन हुआ। मदर टेरेसा का जीवन कोलकाता में बीता और वहीं उनका निधन हुआ। 

संत घोषित करने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में संबंधित व्यक्ति के अनुयायी स्थानीय बिशप के सामने उस शख्स की महानताओं और चमत्कारों को साबित करते हैं।
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संत घोषित करने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है

मदर टेरेसा - फोटो : Getty Images
फिर चर्च की ओर से चुने गए पॉस्चुलेटर के जरिये उस व्यक्ति के चमत्कारों के सबूतों और जानकारियों के आधार पर एक पत्र तैयार किया जाता है जिसके आधार पर पोप उस व्यक्ति को पूज्य की उपाधि देते हैं।

दूसरे चरण में पोप उसे धन्य घोषित करते हैं। टेरेसा को 2003 में धन्य घोषित किया गया था। आखिरी चरण में रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप द्वारा महान व्यक्ति को संत की उपाधि दी जाती है। संत घोषित करने की प्रक्रिया को कैनोनाइजेशन कहते हैं।

‘मदर टेरेसा गरीबों की मसीहा थीं और कमजोर तबके के लिए एक सहारा। उन्हें संत की उपाधि दिए जाने से हर भारतीयों को गर्व होगा।

उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों और बेसहारा लोगों की सेवा में बिता दिया। मदर टेरेसा ईश्वर के हाथ में खुद को एक छोटी सी पेंसिल के तौर पर देखती थीं और अपना काम शांतिपूर्ण तरीके से करती थीं। हमेशा उनके चेहरे पर मुस्कान रहती थी।’
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