मदर टेरेसा ने जिन गरीबों और बेसहारों की सेवा की, उनके लिए वे जीवित संत थीं। वेटिकन में भी कई अनुयायी इससे सहमत हैं लेकिन कैथोलिक चर्च किसी को आसानी से संत की उपाधि नहीं देता। संत घोषित किए जाने की लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
मदर टेरेसा को संत घोषित किए जाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से रविवार को पूरी हो जाएगी जब पोप फ्रांसिस उन्हें नया संत घोषित कर देंगे।
संत की उपाधि देने की प्रक्रिया की शुरुआत वहां से होती है, जहां उस महान व्यक्ति ने जीवन बिताया और जहां उसका निधन हुआ। मदर टेरेसा का जीवन कोलकाता में बीता और वहीं उनका निधन हुआ।
संत घोषित करने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में संबंधित व्यक्ति के अनुयायी स्थानीय बिशप के सामने उस शख्स की महानताओं और चमत्कारों को साबित करते हैं।