मुफलिसी ने एक मां का दिल पत्थर सा सख्त कर दिया। न कहीं से किसी मदद की उम्मीद और न पति की हालत सुधरने की आस..तब मजबूर मां ने कलेजे पर पत्थर रखकर अपने पंद्रह दिन के मासूम बेटे को 42 हजार रुपये में बेच दिया। पड़ोसियों ने जब बच्चा गायब देखकर दंपति से उसके बारे में पूछा तो यह हकीकत सामने आई।
हाफिजगंज के गांव ढकिया खो निवासी मजदूर हरस्वरूप मौर्य ने कहा, बेचते नहीं तो क्या करते और कोई चारा भी तो नहीं था। इलाज नहीं हो सका सो पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। रोजी-रोटी कमाने लायक नहीं रहा तो घर में फाके होने लगे।
हरस्वरूप की पत्नी संजू ने बताया कि पति की सलामती के लिये यह कदम उठाया है। तीन महीने पहले खटीमा में निर्माणाधीन मकान में मजदूरी करते वक्त पाड़ से नीचे गिरने पर उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई है। इससे कमर से नीचे का हिस्सा बेजान हो गया है।
जब पूछा गया कि बच्चे के जाने का दुख नहीं है क्या? वह बोलीं- दुख क्यों नहीं होगा, लेकिन पति के इलाज की खातिर कलेजे पर पत्थर रख लिया है। दो और बच्चे हैं, उनका भी पेट पालना है। मजबूरी में बच्चा बेचना पड़ा। इलाज के लिए पहले गांव के ही कई लोगों से मदद भी मांगी थी लेकिन कोई आगे नहीं आया। अस्पताल वालों ने भी बिना पैसे के इलाज करने से मना कर भगा दिया। कुछ नहीं सूझा तो बच्चे को ही बेच दिया।
न राशन कार्ड है और न जमीन का पट्टा
हरस्वरूप ने बताया कि उसके पास जमीन नहीं है। राशन कार्ड भी नहीं बना है। दो साल पहले गांव में जमीन के पट्टे हुए तो उसने भी कोशिश की लेकिन उसका नाम पट््टा आवंटन के पात्रों की सूची में शामिल नहीं किया गया। इधर, गांव के ही भगत सिंह ने बताया कि जमीन के पट्टे होने में घपला हुआ था। कई अपात्रों को जमीन के पट्टे दिए गए, लेकिन हरस्वरूप जैसे जरूरतमंदों को कुछ नहीं मिला।
वहीं इस मामले में पीतम पाल सिंह, सीओ नवाबगंज का कहना है कि बच्चा बेचे जाने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मामला संवेदनशील है। हाफिजगंज थाना प्रभारी से मामले की जांच कराई जाएगी। अगर मानव तस्करी की बात सामने आती है तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।