13 अप्रैल को अफगानिस्तान में आईएसआईएस के आतंकियों पर अमेरिका द्वारा मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स गिराने के बाद से संकेत माना जा रहा है कि क्या अब दूसरा शीत युद्ध (कोल्ड वॉर-।।) शुरु होने जा रहा है या हो चुका है?
ऐसा लोग इसलिए भी मान रहे हैं क्योंकि अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड नतीजों की परवाह किए बिना कार्रवाई करने में सक्षम हैं। अमेरिका और रूस के बीच पहली शीत युद्ध चार दशक से भी ज्यादा समय तक चला था।
दूसरे शीत युद्ध का अनुमान इसलिए भी लगाया जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लेकर मध्य पूर्व तक आतंकवाद उभर रहा है। जिसकी वजह से प्रमुख शक्तियों हस्तक्षेप कर रही हैं और टकराव बढ़ रहा है। जहां एक तरफ रूस सीरिया में बशर अल असद के सत्ता में बने रहने के पक्ष में है, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका असद को सत्ता से हटाने पक्ष में।
इसके अलावा चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर कब्जा करने की कोशिशों में लगा है। साथ ही चीन पाकिस्तान के अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह पर भी अपने पकड़ मजबूत करने में जुटा है।
पाकिस्तान के बाद चीन का दूसरा सैन्य सहयोगी उत्तर कोरिया है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने अमेरिका को लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों से तबाह करने की धमकी दी थी। इसके जवाब में अमेरिका ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया परमाणु या मिसाइल परीक्षण करता है तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।
रूस और चीन दोनों ने ही जमीन, आसामान और समुद्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया है, खासकर अमेरिकी सहयोगियों और जापान के आस-पास।