करीब नौ उप स्वरूपों की पुष्टि भी की गई है जो एक्सबीबी परिवार से जुड़े हैं। इन्साकॉग के अनुसार, देश में अब कोरोना वायरस के डेल्टा, अल्फा, गामा या फिर ओमिक्रॉन स्वरूप मरीजों में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
करीब दो माह बाद कोरोना के दैनिक मामलों में अब गिरावट आने लगी है। वहीं, संक्रमित मरीजों के सैंपल से जीनोमिक निगरानी के बाद इन्साकॉग ने जानकारी दी है कि देश में कोरोना वायरस के अन्य स्वरूप लगभग गायब हो चुके हैं। मौजूदा समय में एक्सबीबी से जुड़े उप स्वरूप प्रसारित हो रहे हैं।
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करीब नौ उप स्वरूपों की पुष्टि भी की गई है जो एक्सबीबी परिवार से जुड़े हैं। इन्साकॉग के अनुसार, देश में अब कोरोना वायरस के डेल्टा, अल्फा, गामा या फिर ओमिक्रॉन स्वरूप मरीजों में दिखाई नहीं दे रहे हैं। बीते 10 सप्ताह की स्थिति यह रही कि लगभग सभी मरीजों में एक्सबीबी परिवार के ही उप स्वरूप मिले हैं। इनमें एक्सबीबी.1.16 उप स्वरूप ऐसा है जो 60 फीसदी से ज्यादा मरीजों में देखने को मिल रहा है।
अरुणाचल के विभिन्न जिलों में मुफ्त पुस्तकालय प्रशंसनीय प्रयास : पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में नि:शुल्क पुस्तकालय केंद्र स्थापित करने के लिए एक शिक्षण संस्थान की सराहना की। न्गुरांग शिक्षण संस्थान ने पूर्वोत्तर राज्य के विभिन्न जिलों में सड़क के किनारे पुस्तकालय स्थापित किए हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू के एक ट्वीट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने इसे प्रशंसनीय प्रयास करार दिया।
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गोवा में 90% अपराधों को प्रवासी मजदूरों ने अंजाम दिया : सीएम
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने दावा किया कि तटीय राज्य में करीब 90 फीसदी अपराध बिहार, उत्तर प्रदेश तथा अन्य इलाकों के प्रवासी मजदूरों ने अंजाम दिए हैं। उन्होंने ठेकेदारों से इन मजदूरों को काम पर रखने से पहले ‘लेबर कार्ड’ लेने का अनुरोध किया। सावंत ने पणजी में एक मई को मजदूर दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में काम कर रहे प्रत्येक प्रवासी मजदूर के पास राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला लेबर कार्ड होना चाहिए।
आरएंडडी को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट कानूनों को आसान बनाएगा भारत
भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 को अधिक सरल और अनुसंधान के अनुकूल बनाने पर विचार किया जा रहा है। केंद्र ने यह जानकारी मंगलवार को दी। सीआईआई ग्लोबल साइंस, रिसर्च एंड इनोवेशन समिट को संबोधित करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार अखिलेश गुप्ता ने कहा, भारत प्रति वर्ष औसतन 23,000 पेटेंट आवंटित करता है। भारत में पेटेंट दाखिल करने की समयावधि तीन साल है, जबकि वैश्विक औसत अवधि दो साल है। केंद्र सरकार देश में अनुसंधान, विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए पेटेंट कानूनों को सरल बनाने पर विचार कर रही है।