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विहिप की मांग- राम मंदिर के बगल में मस्जिद स्वीकार नहीं, नकल है तोगड़िया की एएचपी

Mon, 25 Jun 2018 07:31 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
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विश्व हिंदू परिषद ने प्रवीण तोगड़िया के नए संगठन अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद विद्वेष और नकल पर आधारित बताया है। साथ ही विहिप ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर की सुनवाई में ढिलाई बरतता है, तो उनके पास सारे विकल्प खुले हुए हैं। वहीं विहिप ने साफ कर दिया कि राममंदिर के बगल में मस्जिद बनाना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।  

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सोमवार को दिल्ली में हुई विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक में राम मंदिर, गोरक्षण और संवर्धन मंत्रालय तथा रोहिंग्या घुसपैठ जैसे मामलों पर चर्चा हुई। विहिप ने कहा कि गोहत्या और गोवंश की तस्करी पर बने कानून का सख्ती से पालन किया जाए। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि गौरक्षक संवर्धन मंत्रालय बनाए जाने की आवश्यकता है। 

विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपने पुराने साथी प्रवीण तोगड़िया के बनाए नए संगठन अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद को निशाने पर लेते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के प्रति विद्वेष, अपनी महत्वाकांक्षा और नकल के आधार पर जो संगठन बनते हैं, वे ज्यादा दूर तक नहीं जा सकते। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद सामूहिक नेतृत्व पर काम करने में भरोसा करता है और एएचपी के आने से से विश्व हिंदू परिषद को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचेगा। वहीं उन्होंने तोगड़िया की घर वापसी के सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि हमारे दरवाजे हमेशा से खुले रहे हैं, आना उनके हाथ में है। 

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कोई मस्जिद स्वीकार्य नहीं

वहीं राम मंदिर बनाए जाने के सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि वे सप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करेंगे, लेकिन कानूनी रूप से इसके बगल में मस्जिद बनाने पर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नजरों में यह केवल भूमि विवाद का मामला है और अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा के भीतर उन्हें कोई मस्जिद स्वीकार्य नहीं है, इससे बाहर अगर मुस्लिम भाई मस्जिद बनाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। 

आलोक कुमार ने कहा कि जुलाई से इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी और इस साल के आखिर तक अदालत का आदेश आ जाएगा और यह मंदिर बनाने के पक्ष में होगा, और अगले साल से मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी वकीलों से बात हुई है और अभी सब कुछ हमारे पक्ष में है और हम विजयी होंगे।

वहीं यह पूछे जाने पर कि अगर फैसला आने में देरी हुई तो विहिप की क्या अगली रणनीति होगी। इस सवाल का जवाब देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि हम देखेंगे कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को कितनी रफ्तार से सुनता है और अगर दो-तीन महीने में कोई खास प्रगति नहीं होती है और देश की अन्य अदालतों की तरह अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले को लंबा लटकाता है, तो हम आगे की कार्रवाई के लिए साधु-संतों के पास जाएंगे और उनका मार्गदर्शन लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे पास सारे विकल्प खुले हुए हैं।
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रोहिंग्या मुसलमानों की बढ़ती संख्या बाहरी

वहीं रोहिंग्या मुसलमानों की बढ़ती संख्या पर आलोक कुमार ने कहा कि देश में रोहिंग्या मुसलमानों की बढ़ती संख्या बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या ने सेना बनाई थी, जो बेहद खतरनाक है।

उन्होंने कहा कि हम मांग करते हैं कि घुसपैठ को रोकने के लिए कानून बनाना चाहिए और भारत-बांग्लादेश सीमा को सील करना चाहिए। बीएसएफ के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसी तैनात करने और संसदीय समिति का गठन किया जाना चाहिए और जो घुसपैठिए हैं उनको वापस भेजा जाना चाहिए।

वहीं विहिप ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी सजग नागरिकता के धर्म का पालन करें और अवैध घुसपैठियों की सहायता करना, काम पर रखना बंद करें और उन्हें पहचान कर पुलिस के हवाले करें।  

अपने बयान में विहिप ने कहा कि अनुसूचित जाति व जनजातियों के सशक्तिकरण हेतु उनके आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य व सामाजिक क्षेत्रों के विकास के लिए वहां चल रहे सेवा कार्यों का विस्तार किया जाएगा। फिलहाल देश के लगभग 62 हजार ग्रामों में एकल विद्यालय चल रहे हैं, तथा आगामी दौ वर्षों में यह संख्या एक लाख के पार पहुंचाने का अभियान चलाया जाएगा।
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