महाराष्ट्र की जेलों में बंद दो हजार से अधिक कैदी त्वचा रोग से पीड़ित हैं। राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने प्रश्नोत्तर काल में इस संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब में स्वीकार किया कि राज्य की सेंट्रल और जिला कारागृह में कैदियों को सोने की पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है।
गृहमंत्री ने कहा कि जेलों में जगह की कमी के चलते कैदी एक दूसरे से संपर्क में आते हैं। इसके चलते 2193 कैदियों को त्वचा रोग हो गया है। उन्होंने कहा कि पुणे की येरवडा सेंट्रल जेल की क्षमता 2449 कैदियों की है, लेकिन वहां 5800 कैदी बंद हैं।
देशमुख ने कहा कि पुणे की येरवडा जेल में कैदियों की भारी भीड़ कम करने के लिए आठ और बैरक बनाई जा रही हैं। इनमें से तीन बैरक बनाई जा चुकी हैं, जबकि पांच को बनाने का काम जारी है। येरवडा जेल के पास 320 एकड़ जगह है, इसलिए यहां जगह की कोई समस्या नहीं है। लेकिन अन्य जेलों में भी क्षमता से अधिक कैदी हैं।