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चिंताजनक: वयस्कों के मुकाबले दोगुने बेघर बच्चे सूंघ रहे हैं नशा

अमर उजाला रिसर्च टीम , नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 27 Mar 2021 07:18 AM IST

सार

  • रिपोर्ट- 2019 में भारतीय अधिकारियों ने 3,212 किलो हेरोइन पकड़ी थी।
  • देश में इनहेलेंट की लत से जूझ रहे करीब साढ़े 22 लाख लोगों को मदद की जरूरत
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सांकेतिक तस्वीर

भारत में बेघर बच्चों में सूंघे जाने वाले ड्रग्स (इनहेलेंट) का चलन तेजी से बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण बोर्ड (आईएनसीबी) की ताजा रिपोर्ट में के मुताबिक, देश में वयस्कों की तुलना में ऐसे बच्चे-किशोरों की तादाद दोगुनी है। संस्था ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कम उम्र में ऐसे नशे की आदत बड़े होने पर अन्य अवैध ड्रग्स लेने की ज्यादा आशंकाएं पैदा करती है।

आईएनसीबी के मुताबिक, इनहेलेंट ही ऐसी श्रेणी है, जिसमें बच्चे वयस्कों से आगे मिले हैं। संस्था के 2019 के राष्ट्रीय सर्वे में इनहेलेंट लेने वालों में 1.17 फीसदी बेघर बच्चे और किशोर थे तो वयस्कों की तादाद 0.58 फीसदी थी।



बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में इनहेलेंट की लत से जूझ रहे करीब साढ़े 22 लाख लोगों को मदद की जरूरत है। इसके अलावा देश में 45 से 64 साल के लोगों में नशे के रूप में कफ सीरप और नॉन-मेडिकल पदार्थों का भी काफी उपयोग हो रहा है।

भारत की तरह ही पड़ोसी देश बांग्लादेश और नेपाल में भी ऐसा ही चलन देखने को मिला है। वहां स्कूली बच्चों में सॉल्वेंट के इस्तेमाल की लत तेजी पकड़ रही है।

भारत ने पकड़ी तीन हजार किलो से ज्यादा हेरोइन : रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में भारतीय अधिकारियों ने 3,212 किलो हेरोइन पकड़ी थी। इसमें से अधिकांश अरब सागर और बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी रास्तों से देश में आई थी।

आईएनसीबी का कहना है कि म्यांमार से हेरोइन तस्करी भारत के लिए ज्यादा चिंताजनक ट्रेंड है। अकेले 2019 में अधिकारियों ने सीमा पर दो करोड़ से ज्यादा ट्रामाडोल की गोलियां जब्त की थीं।
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सांकेतिक तस्वीर
भारत में बेघर बच्चों में सूंघे जाने वाले ड्रग्स (इनहेलेंट) का चलन तेजी से बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण बोर्ड (आईएनसीबी) की ताजा रिपोर्ट में के मुताबिक, देश में वयस्कों की तुलना में ऐसे बच्चे-किशोरों की तादाद दोगुनी है। संस्था ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कम उम्र में ऐसे नशे की आदत बड़े होने पर अन्य अवैध ड्रग्स लेने की ज्यादा आशंकाएं पैदा करती है।

आईएनसीबी के मुताबिक, इनहेलेंट ही ऐसी श्रेणी है, जिसमें बच्चे वयस्कों से आगे मिले हैं। संस्था के 2019 के राष्ट्रीय सर्वे में इनहेलेंट लेने वालों में 1.17 फीसदी बेघर बच्चे और किशोर थे तो वयस्कों की तादाद 0.58 फीसदी थी।

बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में इनहेलेंट की लत से जूझ रहे करीब साढ़े 22 लाख लोगों को मदद की जरूरत है। इसके अलावा देश में 45 से 64 साल के लोगों में नशे के रूप में कफ सीरप और नॉन-मेडिकल पदार्थों का भी काफी उपयोग हो रहा है।

भारत की तरह ही पड़ोसी देश बांग्लादेश और नेपाल में भी ऐसा ही चलन देखने को मिला है। वहां स्कूली बच्चों में सॉल्वेंट के इस्तेमाल की लत तेजी पकड़ रही है।

भारत ने पकड़ी तीन हजार किलो से ज्यादा हेरोइन : रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में भारतीय अधिकारियों ने 3,212 किलो हेरोइन पकड़ी थी। इसमें से अधिकांश अरब सागर और बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी रास्तों से देश में आई थी।

आईएनसीबी का कहना है कि म्यांमार से हेरोइन तस्करी भारत के लिए ज्यादा चिंताजनक ट्रेंड है। अकेले 2019 में अधिकारियों ने सीमा पर दो करोड़ से ज्यादा ट्रामाडोल की गोलियां जब्त की थीं।
 

65 साल वालों में ड्रग्स ने पकड़ा जोर

आईएनसीबी के मुताबिक, कुछ वर्षों से दुनियाभर में 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में ड्रग्स का इस्तेमाल जोर पकड़ा है। इस स्वतंत्र संस्था से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि इस महामारी में दवाओं की वैश्विक आपूर्ति गड़बड़ाने से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।

इससे लोगों में नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ा है। इस दौरान बुजुर्गों में दर्द निवारक, ट्रैंक्यूलाइजर और सुन्न करने वाली दवाओं का उपयोग बढ़ा है। अमेरिका जैसे देश में बुजुर्गों में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल तीन गुना बढ़ा है।

ड्रग्स का इस्तेमाल अधिक उम्र वाले लोगों में महामारी की तरह फैल रहा है। ड्रग्स का चलन और इससे जुड़ी मौतें भी वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं। इस ट्रेंड को बदलने के लिए दुनियाभर की सरकारों को फौरन कदम उठाने होंगे। -कॉर्नेलिस डी जॉनशीरे, अध्यक्ष, आईएनसीबी
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