रंगभेद के विरोध में अमेरिका में प्रदर्शन
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अमेरिका के मिनीपोलिस में एक पुलिस अधिकारी की निर्ममता से एक अश्वेत अफ्रीकी-अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दुनिया का सबसे ताकतवर देश माने जाने वाले अमेरिका में स्थितियां काबू से बाहर हो गई हैं। देश भर के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। देखा जाए तो अमेरिका में फिलहाल गृह युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। इस घटना के बाद अमेरिका में रंगभेद यानी रेसिज्म का मुद्दा एक बार फिर गर्म हो गया है।
इस घटना का अमेरिका के साथ-साथ अन्य देशों में भी विरोध हो रहा है और इसकी निंदा की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई भारतीयों ने इसके विरोध में लिखा और कई तो यह मानने के लिए खुद को तैयार ही नहीं कर पा रहे थे कि अमेरिका जैसा शक्तिशाली और विकसित देश में भी रंगभेद जैसी समस्याएं इतने विशाल स्तर पर हो सकती हैं। यह जानने के लिए कि भारतीय इस बारे में क्या सोच रखते हैं अमर उजाला ने एक ऑनलाइन पोल कराया।
इस पोल में सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका जैसा सुपर पावर देश भी रंगभेद की बेड़ियों से जकड़ा हुआ है। पोल के जवाब में सामने आया कि 91.59 फीसदी भारतीय यह मानते हैं कि अमेरिका में रंगभेद की स्थिति गंभीर है और अभी भी वहां इस आधार पर भेदभाव किया जाता है। वहीं, महज 8.41 फीसदी लोगों ने कहा कि अमेरिका में रंगभेद की समस्या इतनी गंभीर नहीं है।
अमेरिका में हिंसक प्रदर्शन इतने ज्यादा हो गए हैं कि अब संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में संज्ञान लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना को निराशावादी बताया है। यूएन ने कहा कि पुलिस के हाथों में सालभर में कई अश्वेत अमेरिकन लोगों की मौत हुई है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जॉर्ज फ्लॉएड को मारना उदाहरण है कि कैसे अमेरिका में अश्वेत लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।