साल 2017 में हुई पिछली गणना के हिसाब से भारत में 30 हजार हाथी हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हाथियों का संरक्षण जरूरी है क्योंकि इससे पारिस्थिकी तंत्र संतुलित बना रहता है।
जावड़ेकर ने कहा कि हाथियों को जंगल में ही रखना चाहिए, इसके लिए चारा-पानी वृद्धि कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के परिणाम अगले साल से दिखाई देने लगेंगे।
हाथियों के महत्व की बात करते हुए केंद्रीय राज्य पर्यावरण मंत्री बाबुल सुप्रियो ने केरल में 27 मई को हुई उस घटना की निंदा की जब एक गर्भवती हथिनी की पटाखे भरे फल खाने से मौत हो गई थी।
सुप्रियो ने कहा, हमें अपने हाथियों को बचाना होगा। केरल की घटना अमानवीय थी और ऐसे आपराधिक कृत्यों से निपटा जाएगा। मंत्रालय और राज्य ऐसी गतिविधियों को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति रखते हैं और मुझे भरोसा है कि दोषी को उचित सजा मिलेगी।
मानव-हाथी संघर्ष के चलते होने वाली मौतों की जानकारी देते हुए अतिरिक्त महानिदेशक वन (वन्यजीव) सौमित्र दासगुप्ता ने कहा कि सैकड़ों हाथी प्रवास करते हैं और मानव के संपर्क में आते हैं। इनमें होने वाले संघर्ष के कारण हर साल 500 से अधिक मनुष्यों और 100 हाथियों की मौत हो जाती है।
सौमित्र दासगुप्ता ने कहा कि पिछले पांच सालों में, मंत्रालय ने हाथियों के संरक्षण के लिए कई गतिविधियां शुरू की हैं। कई हाथी कॉरिडोर की पहचान की गई है, बजट को 30 फीसदी बढ़ाया गया है और कई समितियों का गठन भी किया गया है।
आयोजन के दौरान, जावड़ेकर ने मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन के सर्वोत्तम अभ्यासों पर एक पुस्तिका भी जारी की और प्रोजेक्ट हाथी का राष्ट्रीय पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्ट पर हाथियों से संबंधित आंकड़े और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी रहेगी।