कोरोना की वैक्सीन लगवाते स्वास्थ्य कर्मी
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केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देशभर में 50 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों व फ्रंट लाइन वर्कर्स को 21 दिनों के भीतर कोरोना का टीका लगाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने उच्च सदन में बताया कि भारत की टीका लगाने की दर दुनिया में सबसे अधिक है।
टीकाकरण को लेकर एक सवाल के जवाब में चौबे ने कहा, टीकाकरण के शुरुआत में कुछ तकनीकी कारणों से कोविन पोर्टल पर लक्ष्य से कम लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया। हालांकि बाद में इन्हें योजनाबद्ध तरीके से अभियान का हिस्सा बनाया गया।
मंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि 31 जनवरी तक कुल 93.6 लाख स्वास्थ्यकर्मियों और 77.9 लाख फ्रंट लाइन वर्करों ने टीके के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी तक 37.58 लाख वर्करों को टीका लगाया गया। उन्होंने कहा कि टीकाकरण की शुरुआती दर धीमी थी, लेकिन फिर इसमें तेजी आ गई।
स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा टीके पर अधिक भरोसा नहीं करने के सवाल पर चौबे ने बताया कि ऐसा नहीं है, 21 दिनों में 50 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों एवं फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लगा चुका है। उन्होंने बताया कि टीके के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष संचार अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
टीका लगवाने वालों के लिए बीमे का कोई प्रावधान नहीं
अश्विनी चौबे ने एक अन्य सवाल के जवाब में उच्च सदन को बताया कि कोरोना टीका लगवाने वालों के लिए उससे होने वाले किसी भी तरह का प्रतिकूल प्रभाव या चिकित्सीय जटिलता के लिए बीमे का कोई प्रावधान नहीं है।
चौबे ने सदन को बताया कि कोवाक्सिन और कोविशील्ड से 4 फरवरी तक कुल 81 मामले ऐसे आए हैं जिनमें टीके का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, यह कुल टीकाकरण का 0.096 फीसदी है। अश्विनी चौबे ने सदन को यह भी बताया कि करीब 25.7 फीसदी स्वास्थ्य कर्मियों में कोविड-19 के प्रति सीरोपॉजिटिविटी पाई गई है।