ोकेंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) ने हाल ही में लागू किए गए तीन आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के सिलसिले में 43 हजार 150 अधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षित किया है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने दिया जवाब
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के तालमेल से कुल आठ लाख 16 हजार 146 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों समेत आठ लाख 40 हजार 465 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है।
43 हजार 150 अधिकारियों और कर्मी प्रशिक्षित
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि ब्यूरो ने सभी हितधारकों- पुलिस, कारागार अभियोजकों, न्यायिक अधिकारियों, फोरेंसिक विशेषज्ञों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के क्षमता निर्माण के लिए 13 प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित और साझा भी किए है। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने 274 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, वेबिनार और सेमिनार भी आयोजित किए हैं और अब तक मास्टर ट्रेनर समेत कुल 43 हजार 150 अधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
आईजीओटी फरवरी से चला रहा तीन पाठ्यक्रम
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने नए आपराधिक कानूनों को अमल में लाने के लिए क्षेत्रीय पदाधिकारियों के सवालों के जवाब देने और उनके मुद्दों के हल करने के लिए कानून और पुलिस अधिकारियों की एक टीम के साथ एक नियंत्रण कक्ष बनाया है। राज्यसभा को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईजीओटी- कर्मयोगी भारत पोर्टल 21 फरवरी, 2024 से नए आपराधिक कानूनों पर अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए तीन पाठ्यक्रम चला रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से दो लाख 19 हजार 829 अधिकारियों ने कम से कम एक पाठ्यक्रम पूरा किया है, जबकि एक लाख 72 हजार 970 ने तीनों पाठ्यक्रम पूरे किए हैं।
दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ने भी आयोजित किए कार्यक्रम
इसके अलावा, प्रेस सूचना ब्यूरो, दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ने भी तीनों नए कानूनों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम और कार्यशालाए आयोजित की। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी 1,200 विश्वविद्यालयों और 40 हजार कॉलेजों को सूचनात्मक फ़्लायर्स वितरित किए और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने लगभग नौ हजार संस्थानों को इस मुद्दे पर पत्र लिखा है।