देशभर में 1,100 से अधिक गोद लिए गए बच्चे पिछले पांच साल में बाल देखभाल संस्थाओं में वापस आए हैं। बाल दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने बताया कि कारा के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतर बच्चे, खासकर आठ साल से अधिक आयु के बच्चे गोद लेने वाले अभिभावकों के घर के माहौल के अनुसार ढल नहीं पाने के कारण लौट आए।
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 2014-15 में सर्वाधिक बच्चे वापस आए। आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार 2014-15 में गोद लिए गए कुल 4,362 बच्चों में से 387 बच्चे लौट आए।
साल गोद लिए गए लौटे
2014-15 4,362 387
2015-16 3,677 236
2016-17 3,788 195
2017-18 3,927 153
2018-19 4027 133
नए परिवार के अनुसार नहीं पालन-पोषण
कारा के अधिकारी ने कहा, बाल देखभाल संस्थाओं में बच्चों का अलग तरीके से पालन पोषण किया जाता है। उन्हें परिवारों के साथ रहने और उनके अनुकूल ढलने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मामलों में देखा गया है कि बच्चों को बाल देखभाल संस्थाओं में संरक्षकों से इतना लगाव हो जाता है कि उनके लिए उन्हें छोड़कर किसी परिवार के साथ रहना बहुत मुश्किल हो जाता है।
होनी चाहिए काउंसलिंग
अधिकारी ने कहा कि इसके लिए बच्चों को गोद लेने वाले माता-पिता की भी काउंसलिंग की जानी चाहिए और उन्हें भी इसके लिए तैयार किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र पहले, मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर
आंकड़ों के अनुसार गोद लिए गए बच्चों के पिछले पांच साल में वापस आने की संख्या के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा। वहां 273 बच्चे वापस बाल देखभाल संस्थाओं में पहुंचाए गए। इसके बाल मध्य प्रदेश (92), ओडिशा (88) और कर्नाटक (60) का नंबर आता है।