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एनआईए को और ताकत, विदेशों में भी कर सकेगी आतंकी मामलों की जांच 

Tue, 25 Jun 2019 12:34 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनआईए (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को और शक्तियां देने के लिए दो कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे उसे देश के साथ विदेश में भी आतंकी मामलों की जांच का अधिकार मिल जाएगा। सूत्रों ने सोमवार को बताया कि एनआईए कानून और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून में संशोधन के लिए आने वाले दिनों में संसद में दो अलग-अलग बिल लाए जाएंगे। इन संशोधनों के बाद एनआईए को साइबर अपराध और मानव तस्करी के मामलों की जांच करने का भी अधिकार मिल जाएगा। 
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सूत्रों ने बताया कि गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून की अनुसूची 4 में संशोधन से एनआईए आतंकवाद से जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों को आतंकी घोषित कर पाएगी। अभी तक सिर्फ संगठनों को ही ‘आतंकी संगठन’ घोषित किया जा सकता है। मुंबई आतंकी हमले के बाद 2009 में एनआईए का गठन किया गया था। 

2017 से ही गृह मंत्रालय नई चुनौतियों से निपटने के लिए एनआईए को और ताकतवर बनाने के लिए दो कानूनों में संशोधन पर विचार कर रहा है। इसमें साइबर अपराध और किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार देना अहम है क्योंकि मौजूदा समय में इसके खतरों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 
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इसके साथ ही, कैबिनेट ने डीएनए प्रोफाइलिंग बिल को मंजूरी दे दी, जिसमें डीएनए तकनीक के इस्तेमाल को नियंत्रित करने का प्रस्ताव है। जनवरी में यह बिल लोकसभा में पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष का सहयोग नहीं मिलने के बाद गिर गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में नया बिल पेश किया जाएगा। विधेयक में नेशनल डीएनए डाटा बैंक और क्षेत्रीय डीएनए डाटा बैंक बनाने का भी प्रस्ताव है। 

आधार संशोधन बिल लोकसभा में पेश 

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को आधार व अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया। बिल बैंक खाते और मोबाइल फोन कनेक्शन खरीदने के लिए पहचान पत्र के तौर पर स्वेच्छा से इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। यह बिल आधार कानून, 2016 में संशोधन और मार्च में लाए अध्यादेश की जगह लेगा। 

जम्मू-कश्मीर में आरक्षण को विधेयक 

केंद्रीय गृहमंत्री राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में सोमवार को जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक 2019 पेश किया। विधेयक के अनुसार, जम्मू और कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ रहने वाले लोगों को भी प्रत्यक्ष भर्ती, पदोन्नति और पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश में आरक्षण का लाभ वास्तविक नियंत्रण रेखा  (एएलओसी) के साथ रहने वाले लोगों के बराबर मिलेगा। यह विधेयक पूर्व में सरकार द्वारा जारी अध्यादेश की जगह लेगा। 
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