कर्नाटक में मोरल पुलिसिंग के कई मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं। इसके जरिए सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की भी कोशिश की है। अब राज्य में एक बार फिर ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां के दक्षिण कन्नड़ जिले में दो अगस्त की रात को बेलथांगडी तालुके में एक धार्मिक जगह के पास हिंदू कार्यकर्ताओं ने एक ऑटोरिक्शा चालक को पीटा था।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ये घटना रात के करीब नौ बजे हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदू कार्यकर्ता संघ परिवार के थे। उन्होंने ऑटो चालक मोहम्मद आशिक के साथ संभवत: इसलिए मारपीट की थी क्योंकि ऑटो में जो यात्री थी वह एक हिंदू लड़की थी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आशिक तालुक के उजीरे का रहने वाला है। घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।
मई में भी हुई थी ऐसी घटना
राज्य में इस तरह की ये कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले मई में मोरल पुलिसिंग की घटना कर्नाटक के चिक्काबल्लपुर जिले में भी हुई थी। यहां 25 मई को मुस्लिम समुदाय के युवकों के एक समूह द्वारा अपनी मुस्लिम महिला मित्र के साथ घूमने जाने पर एक हिंदू लड़के की पिटाई करने का मामला सामने आया था। आरोपियों ने लड़की के साथ मारपीट की थी और उसे धमकाया भी था।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित चिक्कबल्लापुर के एक छोटे से होटल में बैठे थे, तभी आरोपियों की नजर उन पर पड़ी। युवती बुर्का पहने थी। आरोपियों ने दोनों को देख लिया और युवक के हिंदू होने की पुष्टि करने के बाद उन पर हमला कर दिया। इन्होंने पहले युवक को बाहर बुलाकर उसकी पिटाई कर दी। युवती उसके बचाव में दौड़ी और आरोपी को बताया कि वह उसे अच्छी तरह से जानती है। हालांकि, आरोपियों ने युवती से माफी मांगने को कहा।
बाद में महिला ने आरोपी के खिलाफ चिक्काबल्लापुर थाने में शिकायत दर्ज करायी। इस बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य में नैतिक पुलिसिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सत्तापक्ष और विपक्ष में जारी है खींचतान
गौरतलब है कि कर्नाटक में मोरल पुलिसिंग की घटनाओं के लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच लंबे समय से खींचतान जारी है। राज्य के वर्तमान सीएम सिद्धारमैया अक्सर पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई पर इसे लेकर आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती राज्य सरकार और भाजपा पर मोरल पुलिसिंग को प्रोत्साहित करने का आरोप भी लगाया है। वहीं, इस घटना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक अगस्त को मंगलुरु का दौरा किया था। तब उन्होंने पुलिस को नैतिक पुलिसिंग की घटनाओं में शामिल होने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।