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राज्यसभा में सत्र का दूसरा दिन, बेरोजगारों को 15,000 रुपये प्रति माह भत्ता देने की उठी मांग

Wed, 16 Sep 2020 06:03 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसून सत्र का दूसरा दिन आज - फोटो : ANI
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संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन, मंगलवार को राज्यसभा में सपा सदस्य राम गोपाल यादव ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। सपा सांसद ने कोरोना वायरस महामारी के कारण बड़े पैमाने पर लोगों के बेरोजगार होने और उनमें पैदा हो रही हताशा के कारण आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर जोर दिया।

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यादव ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के कारण अपनी आजीविका गंवाने वाले लोगों को हर महीने 15 हजार रुपये भत्ता देने का सरकार से अनुरोध किया। यादव ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि लॉकडाउन के कारण करोड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई और कई परिवार बिखर गए। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई तो दूर रही, वे भूखे सोने के लिए विवश हो गए।

उन्होंने कहा कि इस महामारी के कारण लोगों में मानसिक तनाव और हताशा बढ़ती जा रही है। ऐसे में लोग आत्महत्या की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इस कड़ी में नोएडा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस बीमारी के कारण 44 लोगों की मौत हुई जबकि पिछले कुछ महीनों में वहां 165 लोगों ने आत्महत्या की।
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यादव ने बेरोजगार हुए लोगों को हर माह 15 हजार रूपये देने की मांग करते हुए कहा कि इससे लोगों को कुछ तो सहारा मिल सकेगा और वे जीवित रह सकेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम से लेकर पूरब तक हर सरकार ऐसा कर रही है और हमें भी ऐसा करना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत में कोविड-19 के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार, हर साल दुनिया भर में आठ लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं और भारत में यह संख्या करीब 1.39 लाख है।

उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि आत्महत्या की कुल घटनाओं में से 15 प्रतिशत भारत में होती हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार 2019 में भारत में ऐसे मामलों की संख्या में चार प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि भारत में साढ़े तीन मिनट में आत्महत्या की एक घटना होती है जो काफी दुखद है।

शर्मा ने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर सात में से एक व्यक्ति के अवसाद से पीड़ित होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण स्कूली बच्चों और छात्रों में अवसाद की समस्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उन बच्चों के बीच यह समस्या और गंभीर है जिन्हें ऑनलाइन पढ़ाई आदि की सुविधा नहीं हैं, मध्याह्न भोजन नहीं मिल पा रहा है और कोविड को लेकर मन में भय तथा अनिश्चितता व्याप्त है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में ठोस नीति बनाने और उचित कदम उठाने का अनुरोध किया।

राज्यसभा में उठी मनरेगा में 200 दिन काम देने की मांग
राज्यसभा में मंगलवार को सांसदों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के 100 दिनों की समय सीमा बढ़ाकर 200 दिन करने की मांग की। शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए कांग्रेस की छाया वर्मा ने कहा, पाबंदी के चलते श्रमिकों के सामने रोजी-रोजगार की गंभीर समस्या हो गई है। उन्हें अधिक काम की जरूरत है। ऐसे में उन्हें 200 दिन काम की गारंटी देनी चाहिए और इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। वर्मा ने कहा मजदूरों को समय से मजदूरी नहीं मिल रही है। इसलिए समय से मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित होना चाहिए। कांग्रेस के ही पीएल पुनिया ने भी लॉकडाउन के दौरान गांव लौटे श्रमिकों को मनरेगा के तहत काम देने और कानून में संशोधन कर न्यूनतम दिहाड़ी तीन सौ रुपये करने की मांग की।

शून्यकाल में उठे कई मुद्दे
टीआरएस के आर सुरेश रेड्डी ने राज्यों के बीच नदियों के जल बंटवारे का मुद्दा उठाया। डीएमके सांसद एम षणमुगन ने प्रधानमंत्री किसान योजना, कांग्रेस के राजीव सातव और मनोनीत सांसद शंभाजी छत्रपति ने मराठा आरक्षण का मसला उठाया। सातव ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से मराठा आरक्षण पर खतरा पैदा हो गया है। भाजपा सांसद केसी राममूर्ति ने ऑनलाइन रमी गेम को विशेष उल्लेख के जरिए उठाया और शिवसेना के अनिल देसाई ने रेलवे प्लेटफार्म टिकट के 10 रुपये से बढ़कर 50 रुपये करने का विरोध किया।
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