अगले महीने के दूसरे हफ्ते से संभावित संसद के मानसून सत्र में अध्यादेशों पर संसद की मुहर लगवाना सरकार की पहली प्राथमिकता होगी। कोरोना के कारण तय समय से पहले स्थगित हुए बजट सत्र के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कई मंत्रालयों से जुड़े 11 अध्यादेशों को मंजूरी दी है। सरकार के पास इसी सत्र में इन अध्यादेशों पर संसद की सहमति हासिल करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते अप्रैल से जून के बीच अलग-अलग बैठकों में 11 अध्यादेशों पर सहमति दी है। अध्यादेश के जरिए लागू कानून पर इसे जारी करने के छह महीने के अंदर या इससे पहले आयोजित होने वाले सत्र में संसद की सहमति हासिल करना अनिवार्य है।
ऐसे में जाहिर तौर पर अल्प समय के लिए आयोजित होने वाले मानसून सत्र में सरकार का ज्यादातर समय अध्यादेशों पर संसद की मंजूरी हासिल करने में ही बीत जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सरकार की योजना दो हफ्ते का सत्र बुलाने की है। माना जा रहा है कि सत्र की शुरुआत 10 सितंबर के आसपास होगी। चूंकि, सत्र में इस बार प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं होंगे।
ऐसे में इन अध्यादेशों के अलावा फेसबुक की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल, गलवां घाटी में 20 सैनिकों के शहीद होने जैसी घटनाओं पर हंगामे के बाद चर्चा की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा की कार्यवाही अब सेंट्रल हॉल में आयोजित करने की भी तैयारी चल रही है। वहीं, राज्यसभा के लिए संसद के दोनों सदनों के इस्तेमाल पर पहले ही सहमति बन चुकी है।
ये हैं अहम अध्यादेश
- मंत्रियों-सांसदों के वेतन-भत्ते में कटौती के लिए वेतन भत्ता एक्ट 1952 में संशोधन अध्यादेश
- महामारी रोग कानून 1857 में संशोधन अध्यादेश
- अनिवार्य वस्तुएं आपूर्ति कानून संशोधन अध्यादेश
- किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य संवर्धन सुविधा अध्यादेश
- किसान सशक्तीकरण एवं संरक्षण अध्यादेश
- होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल कानून संशोधन अध्यादेश
- कर संशोधन कानून संशोधन अध्यादेश
- दिवालिया संहिता कानून संशोधन अध्यादेश
- बैंकिंग विनियमन कानून संशोधन अध्यादेश