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राजनीति के कई रंग दिखाएगा संसद का मानसून सत्र, विपक्ष ने की हमलावर होने की जोरदार तैयारियां 

Wed, 11 Jul 2018 10:52 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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संसद
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संसद के मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए सत्तापक्ष ने 17 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, वहीं 18 जुलाई को आहूत हो रहे हैं सत्र के लिए विपक्ष ने हमलावर होने की जोरदार तैयारियां कर रखी हैं। मानसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त (18 बैठकें) के लिए ही प्रस्तावित है। 
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केन्द्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष संसद को चलाने के लिए जहां विपक्ष से सकारात्मक सहयोग मांगने की तैयारी में हैं, वहीं विपक्ष के नेताओं का साफ कहना है कि केन्द्र सरकार के इरादे ठीक नहीं हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सरकार की मंशा पर विश्वास नहीं किया जा सकता। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष एकजुट है और मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष का सदन में घेराव करेगा।

गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खडगे सक्रिय

कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा में नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में पार्टी के सदन मेंनेता मल्लिकार्जुन खडगे सक्रिय हैं। इसी साल के अंत में राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाबत कमलनाथ पार्टी के मुख्य सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया में सरकार को घेरने की जुगत में हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी मानसून सत्र में सरकार की परेशानी बढ़ाते हुए दिखाई पड़ सकते हैं। टीडीपी ने केन्द्र सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। तृणमूल कांग्रेस के तेवर भी अक्रामक हैं। 
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यही स्थिति राज्यसभा में भी देखने को मिल सकती है। तीन तलाक के मुद्दे पर विपक्ष सत्ता पक्ष को आईना दिखाने की पूरी कोशिश करेगा। इस बिल को लोकसभा की मंजूरी मिल गई है, लेकिन राज्यसभा में अटका है। राज्यसभा में सत्ता पक्ष के पास बहुमत नहीं है। सरकार के लिए राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से जुड़ा बिल भी अहम है। ट्रांसजेडर विधेयक, चिकित्सा शिक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग विधेयक समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। 

इसके अलावा सरकार की छह आध्यादेश लाने की भी तैयारी है। इन सब में सबसे अहम राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव होगा। उपसभापति पीजे कूरियन का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनके स्थान पर नये उपसभापति का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए नाक का सवाल है। सत्ता पक्ष के पास जहां बहुमत नहीं है, वहीं यह चुनाव विपक्ष की एकता का लिटमस टेस्ट होगा।

अरुण जेटली, अनंत कुमार.....अमित शाह

राज्यसभा में अरुण जेटली तो लोकसभा में संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार सत्ता पक्ष की तरफ से फ्लोर प्रबंधन की गोट बिठाते हैं। राज्यसभा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आने के बाद से सत्ता पक्ष की धार बढ़ी है। जेटली, शाह और कुमार मानसून सत्र की सफलता के रणनीति बनाने में जुट गए हैं। मंगलावर 10 जुलाई को शाह ने अरुण जेटली के साथ उनके आवास पर करीब डेढ़ घंटे तक मंत्रणा की है। इसमें पीयुष गोयल समेत अन्य शामिल थे। 

चर्चा के केन्द्र में राज्यसभा में मनमाफिक उपसभापति का चुनाव था। इसके अलावा तीन तलाक के बिल को मंजूरी, राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाले विधेयक समेत अन्य मुद्दे शामिल थे। सत्ता पक्ष ने इसके लिए सहयोगियों के साथ तालमेल बढ़ाने, विपक्ष के नेताओं से सहयोग लेने समेत अन्य मुद्दे पर चर्चा की है। फिलहाल सत्ता पक्ष के तेवर भी सख्त हैं। इस सख्ती का एक कारण आगामी चार विधानसभा चुनाव भी है।

उठेंगे कई मुद्दे

विपक्ष के पास इस बार भी मुद्दों की भरमार है। म.प्र. के मंदसौर के किसानों का मुद्दा हो या सरकार द्वारा खरीफ की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी सरकार के गिरने के बाद केन्द्र सरकार की नीतियां हों या दलित उत्पीडऩ के मामले में सरकार की आध्यादेश लाने की मंशा विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरेगा। उ.प्र. में कानून व्यवस्था का मुद्दा, जेल में ही अपराधी की हत्या जैसे मुद्दे भी विपक्ष उठाने की तैयारी में है। 

एक देश, एक चुनाव(एक साथचुनाव) पर विपक्ष केन्द्र सरकार से खुलकर टकराने के मूड में है। संसद सत्ता पक्ष को घेरने के लिए मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सड़क पर भी आंदोलन, धरना प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। मजदूर,किसान, दलित संगठन अगस्त के पहले सप्ताह में बड़ा प्रदर्शन और राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान करने की तैयारी कर रहे हैं। समझा जा रहा है कि इस दौरान विपक्ष उन्हें अपना समर्थन दे सकता है।

जमकर होगी राजनीतक तकरार

मानसून सत्र काफी अहम है। राजनीतिक दृष्टि से यह अपनी बात रखने के लिए विपक्ष का बड़ा हथियार है। साल के अंत में म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों के चुनाव नतीजे 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव पर भी असर डाल सकते हैं। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में मुख्य राजनीतिक दल इन चार राज्यों में सफलता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक अभियान तेज करने में व्यस्त रहेंगे। 

इसलिए सत्ता पक्ष जहां विपक्ष को एकजुटता का कोई भी अवसर देने के मूड में नहीं है, वहीं विपक्ष अपनी ताकत दिखाकर सत्ता पक्ष की धार भोथरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। ऐसे में जमकर राजनीतिक तकरार होने के आसार हैं। 
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