कोरोना संक्रमण को देखते हुए मौजूदा संसद भवन में नियमित सत्र चलाने को लेकर कई तरह के सवाल हैं। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत सामाजिक दूरी बनाए रखकर वर्तमान भवन में एकसाथ इतने सारे सांसदों के साथ सत्र चलाना मुश्किल है। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऐसी स्थिति में हाइब्रिड और वर्चुअल सत्र संचालन के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सामाजिक दूरी का नियम पालन करने के लिए न तो संसद के सेंट्रल हॉल और न ही विज्ञान भवन इतना बड़ा है कि उसमें सभी सांसदों के बैठने की व्यवस्था हो सके। बताया जाता है कि दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी हाइब्रिड या वर्चुअल सत्र चलाने की संभावना तलाश रहे हैं। हाइब्रिड सत्र के तहत कुछ सांसदों को व्यक्तिगत तौर पर संसद आने की अनुमति होगी, पर शेष सांसद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सत्र में हिस्सा ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें से एक विकल्प पर विचार किया गया है ताकि सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए ऐसे अधिकांश सदस्यों को सदनों में बैठने का मौका मिल सके, जिनकी प्रतिदिन की कार्यवाही में उपस्थिति जरूरी है। संसद का मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई में होता है। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा बुलाई गई बैठक में दोनों सदनों के महासचिवों ने कहा कि सेंट्रल हॉल और विज्ञान भवन में भी सामाजिक दूरी के साथ सभी सांसदों को बैठाने की क्षमता नहीं है।
- नियम के तहत राज्यसभा में मात्र 60 लोगों की व्यवस्था
दोनों महासचिवों ने कहा कि सामाजिक दूरी के नियम के तहत राज्यसभा में करीब 60 सदस्यों और लोकसभा व केंद्रीय कक्ष में 100 से कुछ ज्यादा सदस्यों को बैठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि गैलरी में भी सदस्यों को बैठाया गया तब भी कुल सदस्यों की संख्या से काफी कम सांसदों को जगह मिलेगी।