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Monsoon: पश्चिमी घाट में मानसून की तीव्रता में 800 वर्षों में बाद बढ़ोतरी, जलवायु परिवर्तन का रहा बड़ा असर

Fri, 04 Apr 2025 06:04 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शोध में पाया गया कि मानसून की तीव्रता में अच्छी खासी दीर्घकालिक वृद्धि हुई है जो पश्चिमी घाट और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं को बढ़ाने में योगदान दे रही है। उदाहरण के लिए, 2018 और 2019 में वायनाड और कोडागु में आए विनाशकारी भूस्खलन व बाढ़ को इसी का परिणाम बताया गया है।
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मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले 800 वर्षों में पश्चिमी घाट में मानसून की तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसकी वजह जलवायु परिवर्तन माना जा रहा है। केंद्रीय विवि केरल के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन भारतीय मानसून के पिछले 1600 वर्षों के पैटर्न का विश्लेषण कर इस क्षेत्र में दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तनों को समझने के लिए किया गया है।
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शोध में ये बात आई सामने
शोध में पाया गया कि मानसून की तीव्रता में अच्छी खासी दीर्घकालिक वृद्धि हुई है जो पश्चिमी घाट और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं को बढ़ाने में योगदान दे रही है। उदाहरण के लिए, 2018 और 2019 में वायनाड और कोडागु में आए विनाशकारी भूस्खलन व बाढ़ को इसी का परिणाम बताया गया है। अध्ययन के नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल क्वाटरनेरी इंटरनेशनल में प्रकाशित हुए हैं।
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पारिस्थितिकी तंत्र बेहद संवेदनशील

पश्चिमी घाट एक उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली पर्वत शृंखला है, जिसकी औसत वार्षिक वर्षा तीन से चार हजार मिमी है। केंद्र ने घाट के 56,825.7 वर्ग किमी क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) नामित किया है। यह छह राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में फैला हुआ है।
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