रमेश ने कहा- इस साल दक्षिण एशिया के बहुत से क्षेत्रों में मानसून सामान्य रहेगा। मौसम के सभी मानक जिसमें सर्दियों और वसंत के उत्तरी गोलार्ध पर बर्फ की चादर,
हिंद महासागर की परिस्थिति सहित सभी अच्छे मानसून के पक्ष में है। यह पूर्वानुमान भारत के पड़ोसी राज्यों के लिए भी मददगार होगा। जिनके पास पूर्वानुमान जारी करने और भविष्यवाणियां करने के लिए उन्नत सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।
एसएएससीओएफ के अंतर्गत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार और मालदीव जैसे देश आते हैं। यह सभी एक दूसरे के साथ मौसम सेवाओं को शेयर करते हैं। इस फोरम में बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, म्यांमार औऱ श्रीलंका के मौसम विज्ञानी हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे। यह एसएएससीओएफ की छठवीं बैठक थी जिसका आयोजन भारत ने किया था।
2018 का आंकलन 9 अप्रैल तक मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है। हालांकि तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार, नॉर्थ-ईस्ट के कुछ हिस्सों सहित राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में मानसून के दौरान सामान्य स्तर से नीचे बारिश होगी। मौसम पूर्वानुमान के हिसाब से उत्तरी म्यांमार, दक्षिण-पूर्व श्रीलंका और दश्रिण मालदीव में भी 2018 जून से सितंबर के बीच कम बारिश होगी। वहीं मध्यप्रदेश में पारा बढ़कर 44 डिग्री हो गया है और आने वाले दिनों में इससे राहत मिलने के आसार नहीं हैं।