निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने शुक्रवार को केरल में दक्षिण पश्चिम मानसून के दस्तक देने का एलान किया। हालांकि भारतीय मौसम विभाग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अभी परिस्थितियां इसके एलान की नहीं हैं। आमतौर पर केरल में मानसून एक जून को पहुंचता है लेकिन इस बार तय वक्त से पहले पहुंच गया है। बता दें कि पिछले साल 8 जून को मानसून केरल पहुंचा था।
स्काईमेट मौसम के सीईओ जतिन सिंह ने कहा कि बारिश, आउटवेव लॉन्गवेव रेडिएशन (ओएलआर) वैल्यू और हवा की रफ्तार जैसी सभी परिस्थितियां केरल में दक्षिणपश्चिम मानसून के आने से मेल खा रही हैं। स्काईमेट ने ट्वीट किया कि देश की जमीन पर आखिरकार मानसून-2020 ने दस्तक दे दी। केरल में मानसून अपनी वास्तविक तिथि से पहले ही पहुंच गया।
भारतीयों के लिए चार महीना लंबे मानसून पर्व की शुरुआत हो गई। केरल में मानसून के दस्तक देने के साथ ही देश में चार महीने लंबे बारिश के सीजन की शुरुआत हो जाती है। देश में जून से सितंबर के बीच 75 फीसदी बारिश होती है।
स्काईमेट ने मानसून के 28 मई को ही केरल में पहुंचने की संभावना जताई थी। हालांकि, उसने इसमें दो दिन आगे पीछे की बात भी कही थी। वहीं दूसरी ओर, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने सामान्य तिथि से चार दिन की देरी से यानी कि 5 जून को मानसून के केरल में दस्तक देने की बात कही थी। हालांकि, इस हफ्ते की शुरुआत में विभाग ने कहा था कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती सर्कुलेशन के चलते मानसून के जल्द आने में मदद मिलेगी और यह एक जून को ही केरल पहुंच सकता है।
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि परिस्थितियां अभी तक केरल में मानसून पहुंचने की घोषणा करने के लिए सही नहीं हैं।
अच्छा मानसून अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण
अच्छा मानसून अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही अहम है। देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही सुस्ती में है और कोरोना वायरस के चलते और बदतर होती जा रही है। कृषि प्रधान देश होने के चलते झमाझम बारिश से ही देश में मंदी के कम होने की उम्मीद है।