बच्चों की रीढ़ और गर्दन की सेहत को गंभीर नुकसान
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बच्चों और किशोरों में स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, लंबे समय तक बैठना और गलत मुद्रा, उनकी रीढ़ और गर्दन की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026 में 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट' (आईएपी) के विशेषज्ञों ने इस बढ़ते संकट पर गहरी चिंता जताई है।
वैश्विक सम्मेलन में भारत सहित 32 देशों के 10,000 से अधिक फिजियोथेरेपी पेशेवरों ने भाग लिया। समस्या केवल स्क्रीन पर बिताए गए समय की नहीं है, बल्कि उस दौरान शरीर की स्थिति (पोस्चर) की है। आईएपी की रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण बच्चों की पीठ और रीढ़ में दर्द की समस्याएं बढ़ रही हैं।
970 स्कूली बच्चों पर हुए एक अध्ययन के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, पैसिव गेमिंग और सोशल मीडिया के उपयोग का सीधा संबंध बच्चों की गर्दन और कंधे के दर्द से पाया गया है। 5 से 12 वर्ष के बच्चों पर हुए एक शोध से पता चला है कि बैठकर स्मार्टफोन का उपयोग करते समय उनकी गर्दन आगे की ओर झुक जाती है, जिससे सिर के साथ उसका तालमेल बिगड़ता है।
अभिभावक और स्कूली बच्चों की बेहतरी के लिए उठाएं ये कदम
- पढ़ाई या स्क्रीन के इस्तेमाल के दौरान बच्चों को हर कुछ देर में छोटे-छोटे ब्रेक लेने और थोड़ा टहलने या स्ट्रेचिंग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
- बच्चों के बैठने की कुर्सी और टेबल का संतुलन बिल्कुल सही होना चाहिए, ताकि उनकी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहे।
- मोबाइल देखते समय गर्दन को ज्यादा नीचे झुकाने से बचें। डिवाइस को आंखों के स्तर के करीब लाने का प्रयास करें।
- बच्चों की उम्र के हिसाब से उन्हें रोजाना आउटडोर खेल या व्यायाम करने की आदत डालें।
- यदि बच्चा बार-बार या लगातार पीठ, गर्दन या कंधे में दर्द की शिकायत करता है, तो तुरंत फिजियोथेरेपिस्ट से शुरुआती जांच करवाएं।
- कंप्यूटर स्क्रीन, लैपटॉप या मोबाइल का ऊपरी हिस्सा आंखों के बिल्कुल समानांतर रखें।