राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को कश्मीर के समाधान और गोरक्षकों के सम्मान पर संघ के नजरिए को लोगों के बीच स्पष्ट करने की लाइन दी है। कहा है कि कश्मीर मामले पर वे स्वयं कई बार अटल सरकार के प्रयासों को सराह चुके हैं। वहीं, गोसेवकों पर उठे सवालों पर न सिर्फ संघ बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।
संघ प्रमुख ताजनगरी में पांच दिन के प्रवास के चौथे दिन तीन प्रांतों (ब्रज, मेरठ और उत्तराखंड) के 33 संगठनों के 236 शीर्ष कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। सिकंदरा स्थित एमपीएस स्कूल में मंगलवार को आरएसएस के अनुसांगिक संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों की क्षेत्र व प्रांतीय कार्यकारिणी एवं विविध संगठन कार्यकर्ता बैठक हुई। यह गोपनीय बैठक थी। आमंत्रित सदस्यों के अलावा इसमें किसी को प्रवेश नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में भी अधिकांश कार्यकर्ताओं ने कश्मीर और पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोरक्षकों के संबंध में दिए गए बयान के बाद उठ रहे सवालों पर संघ प्रमुख से प्रश्न किए।
भागवत ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रुख से सहमत थे। अगर, अटल सरकार रहती तो इस समस्या का हल तभी निकल गया होता। वहीं गोरक्षा विषय संघ के मुख्य एंजेंडे में है। प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान से भ्रम की स्थिति बन गई थी, स्वयं प्रधानमंत्री ने दो दिन बाद स्पष्ट कर दिया था।
संगठनों को दिए टिप्स
फाइल फोटो
इसके अलावा उन्होंने सभी संगठनों के बीच समन्वय बनाए रहने के टिप्स दिए। कहा कि सभी संगठन स्वतंत्र, स्वायत्त, स्वावलंबी हैं। सभी के कार्यक्षेत्र, कार्यपद्धति और कार्यकर्ता भी भिन्न-भिन्न हैं। सभी राष्ट्र की उन्नित के लिए कार्य करते हैं।
उन्होंने संगठनों के विस्तार और कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की।
इसमें भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, विद्या भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, अखिल भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ, सहकार भारती, क्रीड़ा भारती, पूर्व सैनिक सेवा परिषद, राष्ट्रीय सिख संगत, विज्ञान भारती, लघुउद्योग भारती आदि के पदाधिकारियों के साथ संगठन के विस्तार और कार्यक्रमों पर चर्चा की। क्षेत्र के संघचालक डा. दर्शनलाल अरोड़ा, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुरेश चंद्र आदि मौजूद थे। संचालन क्षेत्र कार्यवाह मनवीर सिंह ने किया।