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कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई में निभाई अहम भूमिका, दिए कई महापुरुष: भागवत

Mon, 17 Sep 2018 07:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में न तो निरंकुशता है और न ही अहंकार। यह किसी को भी समन्वय बैठकों या रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाता। इसमें महिलाओं की भी बराबर की हिस्सेदारी है। यह देश में विविधताओं का सम्मान करता है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को संघ के बारे में प्रचारित कई भ्रामक प्रचारों पर वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह देश के सबसे लोकतांत्रिक संगठनों में से एक है। इसके मूल में नि:स्वार्थ सेवा और अनुशासन का भाव है।

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दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन-दिवसीय व्याख्यानमाला ‘भविष्य का भारत, संघ की दृष्टिकोण’ पर बोलते हुए उन्होंने दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, गौतम बुद्ध, महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, कम्यूनिस्ट पार्टी के संस्थापक एमएन रॉय, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से लेकर अमूल के संस्थापक डा. वर्गीज कुरियन, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम तक का जिक्र करते हुए बताया कि संघ किस तरह केवल देश और समाज की सेवा में लगा है।

संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन परिचय बताते हुए उन्होंने कई घटनाओं का जिक्र किया जब उन्होंने गांधी के आंदोलन के समर्थन में बैठकें आयोजित कीं या भाषण दिए। एक बैठक की अध्यक्षता तो खुद मोतीलाल नेहरू ने की थी। उनमें देशभक्ति कूट कूट कर भरी थी। वे सशस्त्र क्रांति के समर्थक थे। राजगुरु को फरारी के दौरान उन्होंने मदद की थी। लेकिन बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस में विदर्भ प्रांत के शीर्षस्थ कार्यकर्ता बने। 1931 के लाहौर अधिवेशन में जब कांग्रेस ने संपूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित किया तो संघ ने पूरे देश में संचालन कर इसका समर्थन किया।
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हेडगेवार ने गांव-गांव असहयोग आंदोलन में भाग लिया। अंग्रेजों ने राजद्रोह के आरोप में उन्हें एक वर्ष का सश्रम कारावास की सजा दी। मुकदमे के दौरान उन्होंने जिरह करते हुए मजिस्ट्रेट से पूछा कि ब्रिटेन को किस कानून के तहत भारत पर शासन करने का अधिकार है? उन्होंने ब्रिटिश सरकार की हुकूमत मानने से इंकार कर दिया था। जेल से बाहर आने पर उन्होंने कहा कि केवल जेल जाना ही देशभक्ति नहीं है। जेल से बाहर रहकर लोगों में देशप्रेम की भावना जगाना भी देशभक्ति है।

हेडगेवार के जीवन को स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा बताते हुए भागवत ने कहा कि देश में सभी विचारधाराओं के मानने वाले उनके मित्र थे। उन्होंने एक वामपंथी बैरिस्टर का उदाहरण दिया जिनसे हेडगेवार ने पूछा कि यदि भारत आजाद हो जाएगा तो वे क्या करेंगे? उनके जवाब पर कि वे खुश होकर लड्डू बांटेंगे, संघ संस्थापक ने कहा - मैं भी यही करूंगा। जब दोनों का लक्ष्य एक है तो मतभेद कहां रह सकते हैं।

 

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हिंदू कौन?

वर्तमान समय में संघ की मान्यताओं पर उन्होंने कहा कि संघ के मूल में अनुशासन, सेवा और लोकतंत्र हैं। हमारे यहाँ हर स्वयंसेवक को अपने मन का काम करने की स्वतंत्रता होती है। उन्होंने एक छोटे बच्चे का उदाहरण दिया जिसने खुद उनसे शाखा में सवाल जवाब किए। यह दिखाता है कि संघ में कितना लोकतंत्र है। उन्होंने भगवा झंडे पर सफाई देते हुए बताया कि यह हिंदुत्व की परंपरा का प्रतीक है। लेकिन संघ तिरंगे का पूरा सम्मान करता है।

संघ वह संगठन है जो व्यक्ति निर्माण की मैथाडोलॉजी सिखाता है। मूल्यों पर आधारित जीवन जीने वाला हिंदू है। संगठित जीवन जीने वाला हिंदू है। जो पाप न करे वह हिंदू है। यही हिंदुत्व है। इसीलिए संघ हिंदू राष्ट्र की बात करता है।

श्रोता कौन?
व्याख्यानमाला में भाग लेने देश और विदेश के बहुत से लोग थे। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन, सांसद नरेंद्र जाधव, रूपा गांगुली के अलावा बॉलीवुड अभिनेता अन्नू कपूर, मनीषा कोइराला और रवि किशन भी भागवत के सुनने पहुंचे। 
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