संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि संघ मॉब लिंचिंग (भीड़ हिंसा) ही नहीं सब तरह की हिंसा के खिलाफ है और अगर कोई स्वयंसेवक लिंचिंग में दोषी पाया जाता है तो उसे निकाल बाहर किया जाएगा। ‘आरएसएस को जानो’ (Know The RSS) कार्यक्रम में सरसंघचालक ने करीब ढाई घंटे तक विदेशी मीडिया से बातचीत की। उन्होंने इस दौरान कश्मीर, हिंदू राष्ट्र, हिंदुत्व, मॉब लिंचिंग और एनआरसी पर खुल कर संघ का दृष्टिकोण रखा।
अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए भागवत ने कहा कि अब कश्मीरियों की देश से दूरी कम होगी। पहले कश्मीरियों को अलग-थलग करने की कोशिश हुई। भागवत ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का अंग है। इससे संबंधित प्रस्ताव कई बार संसद में पारित हुआ है। इस फैसले से कश्मीरियों को अपनी नौकरी-जमीन खोने का डर नहीं होना चाहिए। कश्मीर के लोग देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। सही अर्थों में विकास में भागीदार बनेंगे।
भागवत ने कहा, एनआरसी विदेशियों को खदेड़ने के लिए नहीं बल्कि चिह्नित करने के लिए है। चाहे हिंदू हो या मुसलमान किसी को निकाला नहीं जाएगा। सभी देश अपने यहां विदेशियों को चिह्नित करते हैं, भारत में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है। इस आशय की पहल तो प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय भी हुई थी।
भागवत ने विदेशी मीडिया को बताया कि राम मंदिर सिर्फ किसी धर्म विशेष या पूजा पाठ से जुड़ा मामला नहीं है। भगवान राम इस देश की संस्कृति के प्रतीक हैं। उनका अयोध्या में जन्म हुआ। उनके जन्मस्थान पर मंदिर बनाया जाना जरूरी है।