शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद बिहार सरकार आलोचना के दायरे में आई थी।
बिहार के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। उन्हें बीते 7 सितंबर को पटना हाईकोर्ट ने जमानत दिया था। 11 साल में जेल में रहने के बाद 10 सितंबर को वह रिहा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद शहाबुद्दीन ने सीवान हाईकोर्ट में सरेंडर किया।
तीन बेटों की हत्या के मामले में पैरवी कर रहे चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदाबाबू के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चंदाबाबू और बिहार सरकार की दोनों अपीलों को मंजूर कर लिया है। इसके बाद माननीय उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि वह शहाबुद्दीन को तुरंत गिरफ्तार करके जेल भेज। इसके साथ ही राजीव रोशन के ट्रायल को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात से भी नाराजगी जताई कि मौजूदा मामले में भी राज्य सरकर ने हाइकोर्ट के सामने पूरे साक्ष्य नहीं रखे और दो भाइयों की हत्या के मुकदमे में पैरवी में भी ढिलाई बरती। जिसकी वजह से हाईकोर्ट के सामने उसे जमानत देने के सिवाय कोई चारा नहीं रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार सोती रही, जिसका शहाबुद्दीन को फायदा मिला। जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस अमिताभ राय की पीठ ने सरकार के सामने एक के बाद एक प्रश्नों की लाइन लगा दी।
बताते चलें कि इससे पहले कोर्ट ने पूछा था कि जब शहाबुद्दीन को 45 मामलों में जमानत मिली तब आप सो रहे थे क्या? तब आपने जमानत का विरोध क्यों नहीं किया? वह जेल से बाहर आया तो अब आपको अपनी गलती का एहसास हुआ?