बता दें कि सरकार को इस स्कीम में दस हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च करने होंगे। इसमें से छह हजार करोड़ रुपये केंद्र सरकार वहन करेगी जबकि चार हजार करोड़ का योगदान राज्य सरकारों का होगा।
इस योजना को बनाने से जुड़े अधिकारियों के अनुसार बीमा कंपनियों से निविदा मंगाई जाएगी और सबसे कम दाम पर बीमा करने वाली कंपनी को ही ठेका दिया जाएगा। फिलहाल तीस हजार रुपये प्रति परिवार वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में सालाना प्रीमियम पांच सौ से साढे़ छह सौ रुपये आ रहा है।
पांच लाख रुपये प्रति परिवार के स्वास्थ्य बीमा वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का प्रीमियम एक हजार रुपये आने की उम्मीद है। इस योजना का दुरुपयोग न किया जा सके इसलिए इसे परिवार के मुखिया के पैन नंबर और आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा।
हालांकि केंद्रीय बजट में इस योजना के लिए सिर्फ दो हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि यह धनराशि योजना की नींव तैयार करने के लिए दी गई है। जितने और पैसे की जरूरत होगी, उतना धीरे धीरे रिलीज किया जाएगा।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले बारह सालों से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 30 करोड़ लोगों के लिए चल रही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दस फीसदी से भी कम लोग उठा पाए थे।