दोकलम पर स्वराज ने कहा कि वहां यथास्थिति बनी हुई है, कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसका मतलब ये है कि दोनों देशों की सेनाएं खुद ही लाइन क्रॉस कर जाती हैं तो इस बात को सेनाएं समझें। विवाद की स्थिति ना बने। उन्होंने कहा कि दोकलम विवाद को जंग के बिना ही सुलझाया गया है। पूरे अंतरराष्ट्रीय जगत में इसकी सराहना की गई कि इस मुद्दे को कूटनीति और संवाद के जरिए सुलझा लिया गया और युद्ध की नौबत नहीं आई।
पाक से आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं
विदेश मंत्री ने पाक पर कहा कि जब सरहद पर जनाजे उठ रहे हों, तो बातचीत की आवाज अच्छी नहीं लगती। उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने चार फॉर्मूले रखे थे, तब भी मैंने कहा था कि आतंकवाद छोड़ना ही एक फॉर्मूला है।' उन्होंने कहा कि पठानकोट हमला, सीमा पर फायरिंग और घुसपैठ के बीच बातचीत संभव नहीं हो सकती।
हालांकि जो मैकेनिज्म बना है, उसके जरिए बातचीत होती है। 'हम ये कहते हैं कि आतंकवाद पर बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा पाकिस्तान अलग थलग पड़ा है इसलिए वह बातचीत करना चाहता है। ये भारत की सबसे बड़ी कामयाबी है।