प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाइप्रोफाइल अमेरिका यात्रा में आखिर वो पल भी आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात हुई। दोनों ने एक साझा प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित किया और उसके बाद विश्व के दो बड़े नेता एक दूसरे के गले मिले। इस दौरान मोदी और ट्रंप के बीच जैसी गर्मजोशी दिखी उसने कुछ लोगों को हैरान भी कर दिया, खासकर उन्हें जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मूड को लेकर हमेशा असमंजस में रहते हैं। जिन्हें नहीं लगता की ट्रंप किसी के साथ इतनी आत्मीयता के साथ मेल मिलाप भी कर सकते हैं।
लेकिन मोदी से मुलाकात के दौरान ट्रंप का रुख पूरी तरह बदला रहा, वह वो ट्रंप नहीं दिखे जिन्होंने कुछ दिन पहले ही पेरिस पर्यावरण समझौते से यह कहकर अपने कदम पीछे खींच लिए थे कि इससे भारत जैसे देशों को अमेरिका से ज्यादा पैसे ऐंठने का मौका मिलेगा।
मोदी से मुलाकात में वह पूरी तरह तरह बदले-बदले नजर आए, हालांकि अभी भी उनके रुख और इरादों को लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि मोदी और भारत के प्रति डोनाल्ड ट्रंप कुछ उत्साहित तो हैं, चाहे वो भारत से व्यापार का मामला हो या सामरिक साझेदारी का या फिर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर कदम मिलाकर साथ चलने का। मोदी और ट्रंप के बीच की इस कैमिस्ट्री से दुनिया को मिले पांच संदेशों पर डालते हैं एक निगाह।
आतंकवाद पर भारत-अमेरिका एक साथ
मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच एक मुद्दे को लेकर आम सहमति रही, वो है कट्टर इस्लामिक आतंकवाद। जिसके खात्मे के लिए दोनों नेताओं ने एक साथ आगे बढ़ने का संकल्प भी लिया। इसका असर भी उस समय देखने को मिला जब अमेरिका ने ट्रंप मोदी मुलाकात से पहले ही हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सैयद सलाउद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया। इसी के साथ ही सलाउद्दीन के खिलाफ कमान कसने की तैयारी शुरू हो गई। वहीं दोनों देशों ने आतंकियों के ठिकाने पर एक साथ वार करने की योजना पर भी हामी भरी। इसी कड़ी में दोनों देश जापान के साथ मिलकर सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास करेंगे।
व्यापार बढ़ाने को लेकर दोनों नेता उत्साहित
डोनाल्ड ट्रंप की पहचान मूलरूप से एक उद्योगपति के तौर पर है, जो व्यापार में फायदा पहुंचाने वालों को अच्छी तरह से पहचानता है। ऐसे में साफ है कि ट्रंप की निगाहें मोदी और भारत दोनों पर जमी हुई हैं। ट्रंप को भारत अमेरिका के लिए एक बड़े बाजार के रूप में नजर आ रहा है, ऐसे में साफ है कि आने वाले कुछ सालों तक अमेरिका भारत का अहम सहयोगी रहेगा। ट्रंप बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि भारत उनसे छिटककर चीन या अन्य देशों के निकट जाए।
चीन जैसे देशों को कड़ा संदेश
मोदी के अमेरिका दौरे से पहले ही जिस तरह ट्रंप ने उन्हें और भारत को अपना सच्चा दोस्त बताया उसका संदेश साफ था कि वह भारत को किस नजरिए से देखते हैं। खासकर चीन के लिए यह बड़ा संदेश है, जो दक्षिण एशिया में अपनी बादशाहत कायम करने में जुटा है। यही कारण है कि ट्रंप के सच्चे दोस्त वाले ट्वीट पर चीन से ही कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत को सच्चा दोस्त बताकर अमेरिका चीन पर निशाना साध रहा है।
रिश्तों की कैमिस्ट्री हुई मजबूत
मोदी और ट्रंप के बीच जिस तरह गर्मजोशी से मुलाकात हुई उससे दोनों नेताओं के बीच रिश्तों की नई केमिस्ट्री देखने को भी मिली। प्रेस कान्फ्रेंस के बाद दोनों नेता जिस गर्मजोशी से एक दूसरे के गले मिले उससे इस बात का एहसास जरूर हुआ कि रिश्तों की यह डोर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जहां छोड़कर गए थे वहीं से ट्रंप ने उसे अपने हाथों में उठा लिया है। भारत को "सच्चा दोस्त" कहना और मोदी के न्यौते पर तुरंत भारत आने का निमंत्रण स्वीकार करना यही दर्शाता है।
अफगानिस्तान पर भारत के रुख को सराहा
आतंकवाद से जूझ रहे अफगानिस्तान का भारत ने जिस तरह से सहयोग किया है उसे अमेरिका ने भी काफी सराहा है। हालांकि पाकिस्तान हमेशा से इस रिश्ते पर निशाना साधता रहा है, पाक का तो यहां तक कहना है कि अफगानिस्तान का उपयोग भारत उसके देश में आतंक फैलाने के लिए करता है लेकिन अफगानिस्तान हमेशा से इसका कड़ा विरोध करता रहा है। अफगानिस्तान तो अपने देश सहित पूरी दुनिया में आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को ही जिम्मेदार ठहराता है। इन दोनों मुद्दों पर ही अमेरिका ने भारत का समर्थन किया है।